देश: की संसद में महिला आरक्षण बिल पर चल रही ऐतिहासिक बहस के बीच एक ऐसा पल आया, जिसने पूरे माहौल को हल्का और यादगार बना दिया। गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने चर्चा के दौरान अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा बयान दिया, जिस पर पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा।
जब महिला आरक्षण बिल जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो रही थी, तब आमतौर पर माहौल गंभीर रहता है। लेकिन रवि किशन ने अपने संबोधन में महिलाओं के सम्मान को लेकर जो बात कही, उसने सभी का ध्यान खींच लिया।
उन्होंने खुले तौर पर कहा कि वे आज भी अपनी पत्नी के पैर छूते हैं और इसमें उन्हें कोई शर्म नहीं है। उनका यह बयान सुनते ही संसद में मौजूद कई सांसद मुस्कुरा उठे और माहौल कुछ देर के लिए हल्का हो गया।
अपने भाषण में रवि किशन ने कहा,
“मैं अपनी पत्नी का बहुत सम्मान करता हूं। मैं उनके पैर छूता हूं और इसे स्वीकार करने में मुझे कोई शर्म नहीं है। आखिर क्यों न छूऊं? वही घर संभालती हैं और मेरे लिए शक्ति का साक्षात रूप हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं का सम्मान करना केवल व्यक्तिगत सोच नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और उनके राजनीतिक दल के संस्कारों का हिस्सा है।
रवि किशन के इस बयान पर सदन में मौजूद सभापति जगदंबिका पाल ने भी मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,
“गइल दूर-दूर तक ई संदेश कि आप पत्नीव्रता हैं…”
उनकी इस टिप्पणी के बाद पूरे सदन में ठहाके गूंज उठे। यह पल सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया, जहां लोग इसे दिलचस्प और अलग अंदाज की राजनीति बता रहे हैं।

हालांकि इस हल्के-फुल्के पल के बीच रवि किशन ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में गंभीरता से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के विकास में महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है और संसद व विधानसभाओं में उनकी संख्या बढ़ाने से लोकतंत्र और मजबूत होगा।
यह पहली बार नहीं है जब रवि किशन ने सार्वजनिक मंच से अपनी पत्नी का जिक्र किया हो। वे अक्सर अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी प्रीति को देते आए हैं। उनका मानना है कि उनके जीवन में जो भी उपलब्धियां हैं, उनमें उनकी पत्नी का बड़ा योगदान है।
संसद में भी उन्होंने इसी भावना को दोहराते हुए कहा कि एक मजबूत परिवार और सहयोगी जीवनसाथी किसी भी व्यक्ति की सफलता की नींव होते हैं।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे महिलाओं के सम्मान का प्रतीक मान रहे हैं, तो कुछ इसे एक राजनीतिक स्टेटमेंट के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि, अधिकांश लोगों ने इसे एक सकारात्मक और सहज अभिव्यक्ति के रूप में लिया है, जो यह दिखाती है कि व्यक्तिगत जीवन के अनुभव भी सार्वजनिक मंच पर प्रभाव छोड़ सकते हैं।
महिला आरक्षण बिल पर चल रही गंभीर बहस के बीच रवि किशन का यह बयान एक अलग ही रंग लेकर आया। जहां एक ओर उन्होंने महिलाओं के सम्मान की बात की, वहीं दूसरी ओर उनके इस अंदाज ने यह भी दिखाया कि राजनीति में मानवीय और व्यक्तिगत भावनाओं की भी जगह होती है।
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