जयपुर: जिले में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला कलेक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं और केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न शैक्षिक योजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाए।
गुरुवार को जिला कलक्ट्रेट सभागार में शिक्षा विभाग की जिला निष्पादक समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं का होना अत्यंत आवश्यक है। यदि विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की कमी होगी तो विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होगी।
बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को विशेष रूप से पीएम श्री स्कूलों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है, इसलिए यहां व्यवस्थाएं पूरी तरह से बेहतर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी विद्यालयों में स्वच्छ और उपयोगी शौचालय, शुद्ध पेयजल, पुस्तकालय, बिजली व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध रहनी चाहिए। यदि किसी विद्यालय में इन सुविधाओं की कमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
जिला कलेक्टर डॉ. सोनी ने बैठक में विद्यालयों के पुस्तकालयों को अधिक सक्रिय बनाने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पुस्तकालयों में उपलब्ध पुस्तकों का नियमित रूप से विद्यार्थियों के बीच वितरण किया जाए।
उन्होंने कहा कि बच्चों को पुस्तकों के अध्ययन के लिए प्रेरित करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे उनकी ज्ञान क्षमता और समझ दोनों बढ़ती हैं। साथ ही विद्यार्थियों में पुस्तकों के संरक्षण और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।
बैठक के दौरान जिले में मौजूद भूमि विहीन विद्यालयों की समस्या पर भी गंभीरता से चर्चा की गई। जिला कलेक्टर ने शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन स्कूलों के पास अपनी जमीन नहीं है, उनके लिए जल्द से जल्द उपयुक्त भूखंड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
उन्होंने कहा कि स्कूलों के लिए पर्याप्त भूमि होना आवश्यक है ताकि वहां भवन निर्माण, खेल मैदान और अन्य सुविधाओं का विकास किया जा सके।
डॉ. सोनी ने विद्यालयों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक विद्यालय में खेल मैदान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद के अवसर भी मिल सकें।
उन्होंने कहा कि खेल गतिविधियां बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी होती हैं। इसलिए स्कूलों में खेलों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
बैठक में जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य और केंद्र सरकार की शिक्षा से जुड़ी सभी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक पहुंचे। इसके लिए अधिकारियों को सतत मॉनिटरिंग और प्रभावी समन्वय के साथ कार्य करना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि राजकीय विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही विद्यार्थियों के जन आधार प्रमाणिकरण और आधार सत्यापन जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
बैठक के दौरान शिक्षा विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर आशीष कुमार, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी मुकुल कविया, जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान के अधिकारी और विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
जयपुर जिला प्रशासन अब सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है। जिला कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बाद उम्मीद है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सुधरेगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।
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