राजस्थान: की राजधानी जयपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक निजी बैंक के शाखा प्रबंधक ने Yes Bank के शीर्ष अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवाई है। पीड़ित का आरोप है कि क्रेडिट कार्ड भुगतान में मामूली देरी होने पर उनका मोबाइल फोन हैक कर लिया गया और उनके परिवार व महिला परिचितों को अश्लील और अपमानजनक संदेश भेजे गए।
यह मामला जयपुर के करणी विहार थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित जयपुर निवासी हैं और एक प्रतिष्ठित निजी बैंक में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि वे लंबे समय से Yes Bank के क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर रहे थे।
फरवरी 2026 में किसी कारणवश उनके क्रेडिट कार्ड बिल के भुगतान में थोड़ी देरी हो गई। इसके बाद कथित तौर पर बैंक से जुड़े रिकवरी एजेंटों ने उन्हें लगातार फोन कर मानसिक रूप से परेशान करना शुरू कर दिया।
पीड़ित का आरोप है कि रिकवरी एजेंटों ने उनसे अपमानजनक भाषा में बात की और उन्हें बार-बार भुगतान करने के लिए दबाव बनाया।
पीड़ित ने अपनी शिकायत में एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आरोपियों ने अवैध तरीके से उनके मोबाइल फोन का डेटा हैक कर लिया।
इस दौरान उनके फोन की पूरी कॉन्टैक्ट लिस्ट तक पहुंच हासिल कर ली गई। इसके बाद 19 फरवरी 2026 से कई अज्ञात नंबरों से उनकी पत्नी, रिश्तेदारों और महिला सहकर्मियों को अश्लील और मानहानिकारक संदेश भेजे जाने लगे।
इन संदेशों का उद्देश्य पीड़ित की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना और उन्हें मानसिक रूप से तोड़ना बताया जा रहा है।
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उन्होंने कथित दबाव के चलते 90,000 रुपये का भुगतान भी कर दिया था। लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से उत्पीड़न बंद नहीं हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला जबरन वसूली (Extortion) और आपराधिक षड्यंत्र का है।
पीड़ित का कहना है कि अश्लील संदेशों के कारण उन्हें और उनके परिवार को समाज में भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।
इस मामले में पीड़ित ने Yes Bank के प्रबंध निदेशक (MD) और CEO विनय मुरलीधर तथा रिकवरी एजेंट सतबीर सिंह सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया है।
पीड़ित का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई और इसमें बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका या संरक्षण हो सकता है।
हालांकि अभी तक बैंक की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जयपुर पुलिस ने शिकायत के आधार पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले में साइबर क्राइम, उगाही और आईटी एक्ट के तहत जांच की जा रही है। मोबाइल डेटा हैकिंग और संदेश भेजने वाले नंबरों की तकनीकी जांच भी शुरू कर दी गई है।
जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि संदेश किस स्रोत से भेजे गए और मोबाइल डेटा तक किस तरह पहुंच बनाई गई।
इस मामले पर कानूनी विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है।
अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के मोबाइल फोन का डेटा उसकी अनुमति के बिना एक्सेस करना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत गंभीर अपराध है।
उन्होंने कहा कि रिकवरी के नाम पर किसी व्यक्ति के परिवार की महिलाओं को अश्लील संदेश भेजना न केवल निजता का उल्लंघन है बल्कि यह मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में भी आता है।
उनके अनुसार यदि आरोप साबित होते हैं तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन में व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी का बड़ा हिस्सा मौजूद होता है। ऐसे में डेटा हैकिंग की घटनाएं लोगों की निजता और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
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