केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि 1 जून 2026 से केवल वही सोलर मॉड्यूल मान्य होंगे, जिनमें इस्तेमाल होने वाले सोलर सेल भारत में बने हों। इसे डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) कहा जाता है। इसका अर्थ है कि विदेश से आए सोलर सेल (Non-DCR) से बने मॉड्यूल वाले प्रोजेक्ट्स को कमीशन की अनुमति नहीं मिलेगी।
समस्या यह है कि भारत में वर्तमान में बहुत कम कंपनियां सोलर सेल का उत्पादन करती हैं। देश में केवल 5-6 बड़ी कंपनियां ही सेल मैन्युफैक्चरिंग कर रही हैं, जबकि 150 से अधिक छोटी और मध्यम कंपनियां (MSME) विदेशी सेल पर निर्भर हैं। बड़ी कंपनियां अपने उत्पादन का ज्यादातर हिस्सा स्वयं के प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल करती हैं।
डीसीआर और नॉन डीसीआर मॉड्यूल की कीमतों में भारी अंतर है। डीसीआर मॉड्यूल की कीमत 24 रुपए प्रति वॉट है, जबकि नॉन डीसीआर मॉड्यूल 16 रुपए प्रति वॉट है।
राजस्थान सोलर एसोसिएशन की ओर से एएलसीएम-2026 के तहत आयोजित बैठक में 300 से अधिक उद्योगपति, निवेशक और सोलर पैनल निर्माता शामिल हुए। सभी ने सरकार से डीसीआर अनिवार्यता को एक साल के लिए आगे बढ़ाने की अपील की।
एसोसिएशन के सीईओ नितिन अग्रवाल ने कहा कि डीसीआर अनिवार्य होने से पूरे सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गति रुक जाएगी, जिससे 125 सोलर मॉड्यूल निर्माता और 500 से अधिक एंसिलरी कंपनियों का कारोबार प्रभावित होगा। कार्यकारी अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने कहा कि वे ‘मेक इन इंडिया’ के पूर्ण समर्थक हैं, लेकिन जब तक भारतीय सेल की आसान उपलब्धता नहीं होती, डीसीआर की अनिवार्यता को लागू करना उचित नहीं।
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