भारत: और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट (RELOS) समझौता अब आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर अधिकतम 3000 सैनिकों तक की तैनाती कर सकेंगे, जो रणनीतिक दृष्टि से एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
RELOS एक लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौता है, जिसके तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों का उपयोग कर सकेंगी। इसमें मिलिट्री बेस, एयरबेस और नौसैनिक बंदरगाह शामिल हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध नहीं, बल्कि शांति के समय सैन्य सहयोग, प्रशिक्षण और संयुक्त अभ्यास को आसान बनाना है।
इस समझौते के तहत:
यह पहली बार है जब भारत और रूस के बीच इस स्तर का लॉजिस्टिक एक्सेस औपचारिक रूप से लागू हुआ है।
RELOS समझौते में केवल तैनाती ही नहीं, बल्कि व्यापक लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है। इसके तहत:
इन सुविधाओं से दोनों देशों की सेनाएं बिना किसी बाधा के लंबे समय तक सहयोग कर सकेंगी।
यह रक्षा समझौता फरवरी 2025 में साइन किया गया था, जबकि दिसंबर 2025 में रूस ने इसे मंजूरी दी। अब यह आधिकारिक रूप से लागू हो गया है और अगले 5 वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
जरूरत पड़ने पर इसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं। यह नया समझौता दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और मजबूत करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे न केवल सैन्य तालमेल बेहतर होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की रणनीतिक स्थिति भी मजबूत होगी।
सरकार और रक्षा सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता किसी भी युद्ध या आक्रामक गतिविधि के लिए नहीं है। इसका उपयोग केवल:
के लिए किया जाएगा।
दुनिया भर में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच इस तरह के समझौते बेहद अहम हो जाते हैं। इससे देशों के बीच भरोसा बढ़ता है और संकट के समय सहयोग आसान हो जाता है।
भारत पहले भी अमेरिका, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ इसी तरह के लॉजिस्टिक समझौते कर चुका है, और अब रूस के साथ RELOS लागू होना इस श्रृंखला का अहम हिस्सा है।
भारत-रूस के बीच लागू हुआ RELOS समझौता दोनों देशों के रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह न केवल सैन्य सहयोग को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर रणनीतिक संतुलन में भी भूमिका निभाएगा। आने वाले समय में यह समझौता दोनों देशों के बीच और गहरे सहयोग का आधार बन सकता है।
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