बिहार: की राजनीति इन दिनों एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया बयान ने सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है। एक ओर उन्होंने देवघर में पूजा-अर्चना कर धार्मिक आस्था का संदेश दिया, तो दूसरी ओर पटना में महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उनके इस बयान पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी जोरदार पलटवार किया है।
रविवार को सम्राट चौधरी झारखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने करीब एक घंटे तक रुद्राभिषेक किया। मंदिर परिसर में उनके पहुंचते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और कई लोग उनके साथ तस्वीरें लेते नजर आए। इस दौरान प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा।
देवघर दौरे से पहले मुख्यमंत्री ने पटना स्थित भाजपा कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सम्राट चौधरी ने कहा कि विपक्षी पार्टियों ने महिला आरक्षण बिल को गिराकर “नारी शक्ति का अपमान” किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, आरजेडी और अन्य दल महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री महिलाओं को आरक्षण देना चाहते थे, लेकिन विपक्ष ने मिलकर इस बिल का विरोध किया। यह महिलाओं के साथ सीधा धोखा है।” उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पार्टियां सिर्फ अपने परिवार तक सीमित राजनीति करती हैं, जबकि उनकी पार्टी पूरे देश की महिलाओं के लिए काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार विधानसभा में फिलहाल केवल 29 महिला विधायक हैं, लेकिन अगर यह बिल पास हो जाता तो यह संख्या 122 तक पहुंच सकती थी। उन्होंने पंचायत स्तर पर 50% महिला आरक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार में 59% तक महिलाएं चुनाव जीतकर आ रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण का उदाहरण है।
मुख्यमंत्री के इन बयानों पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी को महिला आरक्षण बिल की पूरी जानकारी ही नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बिल पहले ही पास हो चुका था, तो उसे लागू क्यों नहीं किया गया।
तेजस्वी ने केंद्र सरकार और भाजपा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे महिलाओं के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “बिहार में फैसले दिल्ली से लिए जा रहे हैं,” और राज्य सरकार स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही।
इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर सम्राट चौधरी विपक्ष से जवाब मांग रहे हैं, वहीं तेजस्वी यादव सरकार की नीतियों और इरादों पर सवाल उठा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण बिल अब सिर्फ एक विधायी मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह चुनावी रणनीति और जनभावनाओं से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
इस सियासी घमासान के बीच 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें सम्राट चौधरी अपनी सरकार का बहुमत साबित करेंगे। यह उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद पहला फ्लोर टेस्ट होगा, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
देवघर की धार्मिक यात्रा से लेकर पटना की राजनीतिक बहस तक, यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि बिहार में राजनीति किस तरह तेजी से करवट ले रही है। महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर जारी यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, खासकर फ्लोर टेस्ट से पहले।
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