राजस्थान: में न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े एक मामले ने गंभीर कानूनी बहस छेड़ दी है। Rajasthan High Court ने Rajasthan Civil Services Appellate Tribunal (रेट) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
मामला अदालत के आदेश में कथित हेराफेरी से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि खुली अदालत में जो आदेश दिया गया, फाइल में दर्ज आदेश उससे अलग है। इस मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने रेट के रजिस्ट्रार से शपथपत्र के जरिए स्पष्टीकरण मांगा है।
इस मामले की सुनवाई Justice Anand Sharma की एकलपीठ में हुई।
बेंच ने याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों को गंभीर मानते हुए रेट की कार्यशैली पर सवाल उठाए और रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि वे शपथपत्र दाखिल कर मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट करें।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है।
यह मामला याचिकाकर्ता Shravan Lal Khowal की याचिका से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता Yuvraj Samant ने अदालत को बताया कि ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान न्याय प्रक्रिया के साथ गंभीर खिलवाड़ किया गया।
याचिका के अनुसार, ट्रिब्यूनल ने ओपन कोर्ट में याचिकाकर्ता के पक्ष में स्टे ऑर्डर दिया था, लेकिन बाद में जारी लिखित आदेश में स्टे देने से इनकार कर दिया गया।
याचिका में बताया गया कि श्रवणलाल खोवाल को जुलाई 2026 में व्याख्याता पद पर पदोन्नति दी गई थी।
लेकिन जून 2025 में राज्य सरकार ने उनकी पदोन्नति को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने रेट में अपील दायर की।
रेट ने 15 जुलाई 2025 को सुनवाई के दौरान पदोन्नति रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी थी। उस समय ट्रिब्यूनल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी स्टे दिए जाने की जानकारी प्रदर्शित हुई थी।
याचिकाकर्ता को तब बड़ा झटका लगा जब उन्हें ट्रिब्यूनल का लिखित आदेश मिला।
यह आदेश 8 अगस्त 2025 का था, जिसमें स्टे देने से इनकार किया गया था।
याचिकाकर्ता का कहना है कि यह आदेश उस दिन का बताया गया, जिस दिन उनका मामला ट्रिब्यूनल की केस लिस्ट में शामिल ही नहीं था।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के सामने यह सवाल उठाया कि जब 8 अगस्त को उनका मामला सूचीबद्ध ही नहीं था, तो ट्रिब्यूनल ने उस दिन का आदेश कैसे पारित कर दिया।
उन्होंने इस आदेश को अवैध और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि आदेश में हेराफेरी कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए रेट के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वे शपथपत्र के माध्यम से पूरी स्थिति स्पष्ट करें।
इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अप्रैल की तारीख तय की है।
इस सुनवाई में रजिस्ट्रार का शपथपत्र और सरकार का जवाब पेश किया जाएगा, जिसके बाद अदालत आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है।
Rajasthan Civil Services Appellate Tribunal में राज्य सरकार के कर्मचारियों की सेवा से जुड़े मामलों की सुनवाई होती है।
सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति, सेवा शर्तों और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े विवादों का निपटारा इसी ट्रिब्यूनल में किया जाता है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.