देश: में एलपीजी गैस की बढ़ती मांग और सप्लाई पर दबाव के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू सिलेंडर की बुकिंग को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में एक बार सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर 45 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि यह कदम गैस की जमाखोरी रोकने और पैनिक बुकिंग को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने संसद में बताया कि मौजूदा वैश्विक हालात के कारण गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। इसलिए सरकार को वितरण प्रणाली को संतुलित रखने के लिए यह फैसला करना पड़ा।
पिछले कुछ दिनों से देश के कई शहरों और कस्बों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
लोगों को डर है कि भविष्य में गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, इसलिए कई लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक कर रहे हैं।
सरकार का कहना है कि इसी वजह से सप्लाई सिस्टम पर अचानक दबाव बढ़ गया और कई जगहों पर गैस की उपलब्धता प्रभावित होने लगी।
एलपीजी सिलेंडर बुकिंग को लेकर पिछले छह दिनों में तीन बार नियम बदले गए हैं।
6 मार्च को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के लिए पहली बार लॉक-इन पीरियड लागू किया गया। इसके तहत एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरा सिलेंडर बुक करने के लिए 21 दिन का इंतजार जरूरी कर दिया गया।
इसके बाद 9 मार्च को अचानक बढ़ती मांग को देखते हुए शहरों में यह अवधि बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई।
फिर 12 मार्च को ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर बुकिंग के अंतर को बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया ताकि सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार गांवों में आमतौर पर एक परिवार सालभर में लगभग पांच सिलेंडर ही इस्तेमाल करता है।
पहले लोग औसतन 55 दिनों के अंतराल पर सिलेंडर बुक कराते थे, लेकिन हाल के दिनों में अचानक यह अंतर घटकर 15 दिन तक पहुंच गया।
मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव अफवाहों और भविष्य की चिंता के कारण हुआ है। लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक करके घरों में स्टॉक जमा करने लगे थे।
मध्य प्रदेश में एलपीजी सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग में भारी दिक्कतें सामने आई हैं।
राज्य के कई शहरों जैसे Bhopal, Indore, Gwalior, Ujjain और Jabalpur में सर्वर डाउन होने की शिकायतें सामने आई हैं।
इस कारण लोग सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं और एजेंसियों पर लंबी कतारें लग रही हैं। कई जगहों पर सिलेंडर मिलने में 7 से 8 दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है।
गैस की किल्लत के बीच कई शहरों में लोग खाना बनाने के लिए वैकल्पिक साधन तलाश रहे हैं।
इंडक्शन कुकटॉप और अन्य इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ी है।
भोपाल में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री करीब सात गुना तक बढ़ने की जानकारी सामने आई है। कई दुकानों पर इसकी कीमतें भी दोगुनी तक हो गई हैं।
एलपीजी संकट का असर होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर भी पड़ रहा है।
भोपाल होटल एसोसिएशन के अनुसार शहर के करीब 2000 होटल और रेस्टोरेंट को पिछले चार दिनों से कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिला है।
इसके कारण कई प्रतिष्ठानों को काम सीमित करना पड़ा है और कुछ जगहों पर रेस्टोरेंट बंद करने की नौबत आ गई है।
राजस्थान के कई जिलों में भी गैस संकट का असर दिखाई दे रहा है।
Chittorgarh में गैस खत्म होने के कारण कुछ रेस्टोरेंट बंद कर दिए गए और कर्मचारियों को अस्थायी रूप से घर भेज दिया गया।
Sawai Madhopur और Jaisalmer में भी होटल और रिसॉर्ट व्यवसाय प्रभावित होने लगा है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग के आरोप सामने आए हैं।
कुछ लोगों का दावा है कि जहां सरकारी कीमत करीब 950 रुपये है, वहीं ब्लैक में सिलेंडर 1600 रुपये तक में मिल रहा है।
कॉमर्शियल सिलेंडर भी 3500 रुपये तक में बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
एलपीजी की कमी का असर फूड डिलीवरी उद्योग पर भी पड़ा है।
ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म Zomato और Swiggy पर ऑर्डर में 50 से 60 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।
‘गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन’ ने कहा है कि इससे हजारों डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई प्रभावित हो रही है।
स्थिति को लेकर केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
इसमें पेट्रोलियम, विदेश, शिपिंग और सूचना-प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने बताया कि देश में हर दिन करीब 50 लाख एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत की लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते आता है।
विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा संकट के पीछे दो बड़ी वजहें हैं।
मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है।
हाल ही में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़े तनाव के कारण ऊर्जा ढांचे पर भी असर पड़ा है।
ड्रोन हमलों के बाद Qatar के कुछ एलएनजी प्लांट का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया गया, जिससे वैश्विक गैस सप्लाई प्रभावित हुई है।
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं।
तेल कंपनियों के अधिकारियों की हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है।
गैस सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए Essential Commodities Act, 1955 लागू किया गया है।
घरेलू सिलेंडर बुकिंग के लिए 25 दिन का लॉक-इन पीरियड तय किया गया है।
गैस डिलीवरी के समय OTP और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है।
सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया गया है।
एलपीजी संकट को लेकर सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सप्लाई को संतुलित रखने के लिए नए नियम लागू किए जा रहे हैं। हालांकि वैश्विक हालात और बढ़ती मांग के कारण दबाव बना हुआ है। ऐसे में सरकार लोगों से अपील कर रही है कि घबराहट में बुकिंग न करें और जरूरत के अनुसार ही गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करें।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.