उत्तर प्रदेश: की राजधानी Lucknow में शुक्रवार को एक बड़ी विकास परियोजना का उद्घाटन हुआ। रक्षा मंत्री और लखनऊ सांसद Rajnath Singh ने शहर के बहुप्रतीक्षित ग्रीन कॉरिडोर के दूसरे चरण का लोकार्पण किया। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी मौजूद रहे।
समता मूलक चौराहे पर आयोजित कार्यक्रम में दोनों नेताओं ने फीता काटकर ग्रीन कॉरिडोर फेज-2 को जनता को समर्पित किया। इसके साथ ही परियोजना के तीसरे और चौथे चरण का शिलान्यास भी किया गया।
इस परियोजना को राजधानी की यातायात व्यवस्था सुधारने और गोमती नदी के किनारे आधुनिक सड़क नेटवर्क विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। ग्रीन कॉरिडोर के दूसरे चरण के शुरू होने से लगभग 10 लाख लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
लखनऊ में गोमती नदी के दोनों किनारों पर विकसित किया जा रहा ग्रीन कॉरिडोर कुल 57 किलोमीटर लंबा होगा। इसे चार चरणों में बनाया जा रहा है।
ग्रीन कॉरिडोर का उद्देश्य शहर के अंदर यातायात को सुगम बनाना, ट्रैफिक जाम कम करना और लोगों को तेज व सुरक्षित यात्रा का विकल्प उपलब्ध कराना है।
इस परियोजना में चौड़ी सड़कें, छह लेन, आधुनिक डिजाइन और हरियाली का विशेष ध्यान रखा गया है। इससे न केवल ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि शहर की सुंदरता भी बढ़ेगी।
ग्रीन कॉरिडोर का दूसरा चरण गोमतीनगर के समता मूलक चौक से शुरू होकर निशातगंज होते हुए हनुमान सेतु और डालीगंज तक जाता है।
इस मार्ग पर छह लेन की चौड़ी सड़क बनाई गई है और दोनों ओर लगभग 11.50 मीटर चौड़ाई रखी गई है।
यह मार्ग शुरू होने के बाद निशातगंज, डालीगंज, बादशाहनगर और समता मूलक जैसे इलाकों में ट्रैफिक का दबाव काफी कम हो जाएगा।
अब वाहन चालकों को शहर के अंदरूनी मार्गों में जाम से जूझने के बजाय गोमती किनारे बने इस कॉरिडोर से सीधे गुजरने का विकल्प मिलेगा।
ग्रीन कॉरिडोर के दूसरे चरण का निर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है। कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना में काम करने वाले श्रमिकों और इंजीनियरों को सम्मानित भी किया।
उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े विकास कार्य के पीछे हजारों श्रमिकों की मेहनत होती है। इसलिए उनका सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है।
इस परियोजना पर करीब 1519 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने एक और बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का काम लगभग पूरा हो चुका है और यह इस महीने के अंत या अप्रैल की शुरुआत में चालू हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद लखनऊ से कानपुर की यात्रा महज 35 से 40 मिनट में पूरी हो सकेगी।
फिलहाल दोनों शहरों के बीच यात्रा में अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक लग जाते हैं, खासकर पीक ट्रैफिक के दौरान।
यह एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच व्यापार, उद्योग और रोजगार के अवसरों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
जनसभा को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी तारीफ की।
उन्होंने कहा कि लोग योगी जी को बुलडोजर बाबा के नाम से जानते हैं। लेकिन बुलडोजर सिर्फ अवैध निर्माण हटाने का ही नहीं बल्कि नए विकास की जमीन तैयार करने का भी प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत हुई है और विकास कार्यों की गति तेज हुई है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राजधानी के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में लखनऊ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने बजट की व्यवस्था भी कर ली है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई तकनीकी संस्थानों के छात्र देश के रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ब्रह्मोस मिसाइल से जुड़े इंजीनियरों में बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है जिन्होंने प्रदेश के संस्थानों से पढ़ाई की है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ रक्षा क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि ब्रह्मोस मिसाइल और एयरोस्पेस से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट लखनऊ में शुरू किए जाएंगे।
यहां ब्रह्मोस की टेस्टिंग और इंटीग्रेशन से संबंधित सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम Brajesh Pathak भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि लखनऊ के विकास में राजनाथ सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि ग्रीन कॉरिडोर बनने के बाद डालीगंज से IIM रोड तक की यात्रा मात्र 15 मिनट में पूरी हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह के विकास कार्यों से राजधानी की पहचान देश के प्रमुख स्मार्ट शहरों में होगी।
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना को चार चरणों में विकसित किया जा रहा है।
फेज-1: IIM रोड से पक्का पुल डालीगंज तक
फेज-2: समता मूलक से हनुमान सेतु डालीगंज तक
फेज-3: डालीगंज से शहीद पथ तक
फेज-4: शहीद पथ से किसान पथ तक
तीसरे और चौथे चरण पर लगभग 1220 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह मार्ग पिपराघाट से किसान पथ तक कनेक्टिविटी देगा।
ग्रीन कॉरिडोर के शुरू होने से राजधानी के कई इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा।
इनमें मुख्य रूप से निशातगंज, डालीगंज, बादशाहनगर, समता मूलक, गोमतीनगर और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।
अब भारी ट्रैफिक शहर की मुख्य सड़कों की बजाय इस कॉरिडोर से गुजर सकेगा, जिससे अंदरूनी मार्गों पर दबाव कम होगा।
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना में सिर्फ सड़क निर्माण ही नहीं बल्कि पर्यावरण और सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया गया है।
कॉरिडोर के किनारे हरियाली विकसित की जा रही है और आधुनिक लाइटिंग सिस्टम लगाया गया है।
इससे यह मार्ग न केवल यातायात के लिए उपयोगी होगा बल्कि शहर की खूबसूरती भी बढ़ाएगा।
झूलेलाल पार्क में आयोजित जनसभा में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक भी शामिल हुए।
सभा स्थल पर लोगों ने विकास परियोजनाओं को लेकर उत्साह भी दिखाया।
लखनऊ में ग्रीन कॉरिडोर के दूसरे चरण का उद्घाटन राजधानी के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे लाखों लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के जल्द शुरू होने की घोषणा से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी बड़ा फायदा मिलेगा।
अगर परियोजना के बाकी चरण भी तय समय में पूरे होते हैं तो आने वाले वर्षों में लखनऊ की यातायात व्यवस्था और शहरी विकास में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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