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सीएम हाउस में पत्रकारों से 3 घंटे खुला संवाद: डिजिटल पत्रकारों को मान्यता देने की उठी बड़ी मांग

राजस्थान: की राजधानी Jaipur स्थित मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित होली मिलन समारोह में प्रदेशभर के पत्रकारों के साथ खुला संवाद देखने को मिला। इस कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma ने पत्रकारों के साथ करीब तीन घंटे से अधिक समय बिताया और उनकी समस्याओं व सुझावों को गंभीरता से सुना।

कार्यक्रम का आयोजन पत्रकारों द्वारा बजट में पत्रकार हित में की गई घोषणाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से किया गया था। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आए सभी पत्रकारों का आत्मीयता से स्वागत किया और उनके लिए भोजन तथा नाश्ते की विशेष व्यवस्था की गई।


पत्रकारों के साथ खुलकर संवाद

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पत्रकारों से बेहद सहज और पारिवारिक माहौल में बातचीत की। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उनके सामने आने वाली समस्याओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकार कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं और समाज तक सच्चाई पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे स्वतंत्रता आंदोलन की भावना को याद रखते हुए अपने नैतिक दायित्वों का ईमानदारी से पालन करें और देश के गौरव को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएं।


पत्रकारों ने रखीं अपनी समस्याएं

कार्यक्रम में Pink City Press Club के अध्यक्ष Mukesh Meena ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए पत्रकारों की कई समस्याओं को उनके सामने रखा।

उन्होंने पत्रकारों की मेडिकल सुविधा, आवास योजना, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार से सकारात्मक कदम उठाने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि आपने अपनी चतुराई से पत्रकारों की मांग बहुत अच्छे तरीके से रख दी है और इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं।


डिजिटल पत्रकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठा

कार्यक्रम के दौरान Indian Media Council के अध्यक्ष Ramakant Goswami ने डिजिटल पत्रकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे मुख्यमंत्री के सामने रखे।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में डिजिटल मीडिया तेजी से आगे बढ़ रहा है और सूचना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसलिए डिजिटल पत्रकारों को भी सरकारी मान्यता यानी अधिस्वीकृति दी जानी चाहिए।

रमाकांत गोस्वामी ने सरकार से मांग की कि डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकारों के लिए स्पष्ट विज्ञापन नीति बनाई जाए ताकि उन्हें भी समान अवसर और सुविधाएं मिल सकें।

इस दौरान इंडियन मीडिया काउंसिल की महासचिव Monika Sharma और पत्रकार Ratiram Gurjar भी मौजूद रहे।


वरिष्ठ पत्रकारों ने भी रखी अपनी बात

कार्यक्रम में कई वरिष्ठ पत्रकारों ने भी मुख्यमंत्री के सामने पत्रकार समाज की समस्याओं को रखा। इनमें प्रमुख रूप से Rupesh Tinker, Anil Lodha, Radha Raman Sharma, Rajkumar Jakhar और Ramendra Solanki शामिल रहे।

पिंक सिटी प्रेस क्लब की डायरेक्टर Shalini Saxena ने भी पत्रकारों की समस्याओं को प्रभावी तरीके से मुख्यमंत्री के सामने रखा और उम्मीद जताई कि सरकार पत्रकारों की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगी।


कार्यक्रम में गूंजे नारे

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकार Vijay Bahadur Gaur ने मुख्यमंत्री से कहा कि “आप भी भरतपुर के हैं और मैं भी भरतपुर का हूं। भरतपुर के लोग संघर्ष से अपनी पहचान बनाते हैं।”

इस पर कार्यक्रम स्थल में “जय गोवर्धन लाल” और “भारत माता की जय” के नारे गूंज उठे और माहौल उत्साहपूर्ण हो गया।


पत्रकारों की प्रमुख मांगें

कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने मुख्यमंत्री के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से पत्रकारों की मेडिकल डायरी की राशि 5000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग शामिल थी।

इसके अलावा पत्रकारों के लिए आवासीय योजना लागू करने, अधिस्वीकृति नियमों में सुधार, गैर-अधिस्वीक्रत पत्रकारों को भी मेडिकल सुविधा देने और पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग भी उठाई गई।

सबसे महत्वपूर्ण मांग डिजिटल पत्रकारों को अधिस्वीकृति देने और उनके लिए अलग विज्ञापन नीति बनाने की रही।


“लल्लू-बिल्लू” की जोड़ी रही चर्चा में

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकारों की चर्चित जोड़ी “लल्लू-बिल्लू” भी चर्चा का विषय बनी रही। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर दोनों में से किसी एक को बोलने का मौका नहीं दिया तो वे बाहर जाकर लड़ पड़ेंगे और दो घंटे बाद फिर एक हो जाएंगे।

मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर कार्यक्रम स्थल में मौजूद सभी लोग ठहाकों से गूंज उठे और माहौल और भी हल्का-फुल्का हो गया।


निष्कर्ष

जयपुर में आयोजित यह होली मिलन और संवाद कार्यक्रम पत्रकारों और सरकार के बीच बेहतर संवाद का उदाहरण माना जा रहा है। कार्यक्रम में पत्रकारों ने अपनी समस्याएं और मांगें खुलकर रखीं, जिनमें डिजिटल पत्रकारों को मान्यता देने का मुद्दा प्रमुख रहा। पत्रकारों का मानना है कि यदि इस तरह के संवाद कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं तो पत्रकारों की समस्याओं के समाधान में और आसानी होगी।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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