हरियाणा: के Panipat में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सबसे अहम बैठक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा शुक्रवार से शुरू हो गई है। यह बैठक संघ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई मानी जाती है और इस बार इसे बेहद महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक में संघ के संगठनात्मक ढांचे, आगामी रणनीति और देशभर में चल रहे अभियानों की समीक्षा की जा रही है।
इस सभा में संघ प्रमुख Mohan Bhagwat स्वयं मौजूद हैं और पिछले सात दिनों से पानीपत में बने संघ केंद्र में रहकर तैयारियों और चर्चाओं की निगरानी कर रहे हैं। बैठक में सरकार्यवाह Dattatreya Hosabale सहित देशभर से संघ और उससे जुड़े 32 संगठनों के करीब 1487 प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।
कार्यक्रम के पहले दिन मंच पर केवल संघ प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले बैठे नजर आए। वहीं Bharatiya Janata Party के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin को मंच के नीचे पहली कतार में स्थान दिया गया।
सभा की शुरुआत के दौरान मीडिया को केवल आठ मिनट के लिए ही अंदर आने दिया गया। इसके बाद हॉल को पूरी तरह बंद कर दिया गया और केवल प्रतिनिधियों को ही अंदर रहने की अनुमति दी गई।
बैठक के दौरान प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में संघ ने दावा किया कि गृह संपर्क अभियान के तहत Kerala में एक लाख से अधिक मुस्लिम और ईसाई परिवारों से संपर्क किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक इनमें 55 हजार से ज्यादा मुस्लिम और 54 हजार से अधिक ईसाई परिवार शामिल हैं। संघ का कहना है कि इस अभियान को अच्छा रिस्पांस मिला है और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद बढ़ा है।
इसके अलावा देशभर में 36 हजार से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनसे संगठन को मजबूती मिलने का दावा किया गया।
संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख Sunil Ambekar ने बताया कि बैठक के पहले दिन संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान किए गए कार्यों की समीक्षा की जा रही है।
संघ 2025-26 में अपने स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। इस शताब्दी वर्ष के तहत अब तक देशभर में 10 करोड़ से अधिक घरों तक संपर्क अभियान चलाया जा चुका है।
दूसरे दिन संगठन के प्रकल्पों में आई चुनौतियों और आगामी एक साल के लिए रणनीति पर चर्चा की जाएगी। अंतिम दिन यानी 15 मार्च को संघ प्रमुख मोहन भागवत का विस्तृत संबोधन होगा।
संघ ने अपने संगठनात्मक विस्तार को लेकर भी महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए हैं।
प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के मुताबिक पिछले एक साल में देशभर में 5500 से अधिक नई शाखाएं शुरू की गई हैं। इसके अलावा डिजिटल माध्यम से भी संघ से जुड़ने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
हर साल लगभग 1.25 लाख लोग ऑनलाइन माध्यम से संघ से जुड़ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक संघ अपने संगठनात्मक ढांचे में भी कुछ बड़े बदलाव करने की तैयारी में है।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र प्रचारकों की संख्या कम की जा सकती है और जिला, तहसील, ब्लॉक और गांव स्तर के कार्यकर्ताओं को अधिक अधिकार देने की योजना बनाई जा रही है।
इस कदम का उद्देश्य संगठन की ताकत को जमीनी स्तर तक मजबूत करना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक आगामी चुनावों को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण है। अगले दो वर्षों में देश के नौ राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं।
इसमें West Bengal, Tamil Nadu और केरल जैसे राज्यों के चुनाव इसी साल होने हैं। वहीं 2027 में Uttar Pradesh और Punjab के चुनाव भी बेहद अहम माने जा रहे हैं।
इन चुनावों को अगले लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है, इसलिए संघ माइक्रो मैनेजमेंट और संगठनात्मक रणनीति पर खास जोर दे रहा है।
बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद बढ़ाने पर भी चर्चा हो रही है।
संघ विशेष रूप से अनुसूचित समाज को साथ जोड़ने के प्रयासों पर जोर दे रहा है। इसी कड़ी में संत शिरोमणि Ravidas की 650वीं जयंती के कार्यक्रमों को भी व्यापक स्तर पर आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक समरसता और एकता का संदेश देने की कोशिश की जाएगी।
पानीपत में चल रही RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा को संगठन के भविष्य की रणनीति तय करने वाली अहम बैठक माना जा रहा है। केरल में अल्पसंख्यक परिवारों तक पहुंच, संगठन के विस्तार और आगामी चुनावों को देखते हुए यह बैठक संघ और उससे जुड़े संगठनों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
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