जयपुर। राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस ने उम्मीदवारों के चयन के जरिए बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी ने सात में से चार सीटों पर सवर्ण चेहरों को मौका देकर नई सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति का संकेत दिया है। राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस के बदलते सामाजिक समीकरणों और 2029 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
कांग्रेस ने इस बार मीनाक्षी नटराजन, पवन खेड़ा, प्रवीण चक्रवर्ती और प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं दो सीटें अनुसूचित जाति वर्ग और एक सीट अल्पसंख्यक वर्ग को दी गई है। लंबे समय से कांग्रेस की पहचान दलित, आदिवासी, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग की पार्टी के रूप में रही है। ऐसे में चार सवर्ण उम्मीदवारों को टिकट देना पार्टी की परंपरागत छवि से अलग कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस अपनी सामाजिक स्वीकार्यता का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रही है। संविधान और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दों पर कांग्रेस को दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों का समर्थन मिला, लेकिन सवर्ण मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती रही है।
केरल में मुख्यमंत्री चयन और कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के बाद अब राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में भी कांग्रेस का अलग राजनीतिक प्रयोग देखने को मिला है। सवाल यह है कि क्या यह नई सोशल इंजीनियरिंग पार्टी को नए वोट बैंक से जोड़ पाएगी या नहीं। इसका जवाब आने वाले चुनावी मुकाबलों में मिलेगा।
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