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राजस्थान की सरकारी तीर्थयात्रा में बुजुर्गों की दुर्दशा के आरोप, 970 यात्रियों ने बताई परेशानी

6 घंटे सड़क पर इंतजार, एक कमरे में 8 लोगों को ठहराने और खराब खाना देने का आरोप; देवस्थान विभाग की योजना पर उठे सवाल

राजस्थान। राजस्थान के देवस्थान विभाग की मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक निःशुल्क तीर्थ यात्रा योजना के तहत गंगासागर की यात्रा पर गए बुजुर्ग यात्रियों ने अव्यवस्थाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उदयपुर से 10 अक्टूबर को विशेष ट्रेन से रवाना हुए 970 यात्रियों का कहना है कि यात्रा के दौरान उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ा। यात्रियों ने कोलकाता पहुंचने के बाद करीब 6 घंटे तक सड़क पर इंतजार कराने, होटल में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने और भोजन की गुणवत्ता खराब होने की शिकायत की है।

6 घंटे सड़क पर बैठने का आरोप

यात्री नरपत के अनुसार, कोलकाता पहुंचने के बाद बुजुर्गों को धार्मिक स्थलों तक ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई थी। करीब 130 किलोमीटर के सफर के दौरान टॉयलेट के लिए बस नहीं रोकने का आरोप भी लगाया गया है। यात्रियों का कहना है कि आगे जाकर बस सड़क पर खड़ी कर दी गई, लेकिन उनकी सहायता के लिए जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर मौजूद नहीं थे। करीब 4 घंटे इंतजार के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ और उन्हें लगभग 6 घंटे तक सड़क पर बैठना पड़ा। बाद में पुलिसकर्मियों के पहुंचने पर अटेंडेंट को बुलाया गया।

होटल और खाने की व्यवस्था पर सवाल

यात्रियों ने ठहरने की व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई। उनके मुताबिक, एक कमरे में 6 से 8 बुजुर्गों को ठहराया गया, जबकि होटल में सुबह 11 बजे तक चाय-नाश्ते की व्यवस्था नहीं थी। कुछ यात्रियों ने धर्मशाला में ठहराने, बाथरूम में पानी नहीं आने और बेड की व्यवस्था ठीक नहीं होने के आरोप भी लगाए।

यात्री ओमप्रकाश कुमावत ने आरोप लगाया कि भोजन के दौरान दो रोटी के बाद तीसरी रोटी देने से मना कर दिया गया। उन्होंने खाने में बदबू आने और भोजन खराब होने की शिकायत भी की। वहीं, कुछ यात्रियों का कहना है कि दी गई पूरियां इतनी सख्त थीं कि बुजुर्ग उन्हें खा नहीं सके और पीने के पानी की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं थी।

कर्मचारियों के व्यवहार पर भी नाराजगी

यात्रियों ने सहायता के लिए तैनात कर्मचारियों पर ठीक से सहयोग नहीं करने और शिकायत करने पर धमकाने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ट्रेन और बस में जरूरत पड़ने पर अटेंडेंट उपलब्ध नहीं रहते थे। कुछ यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि यात्रा पूरी होने से पहले ही उनसे फॉर्म भरवाने का दबाव बनाया जा रहा था।

970 यात्रियों के साथ 30 कर्मचारियों की थी ड्यूटी

जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर को उदयपुर के राणा प्रताप नगर रेलवे स्टेशन से गंगासागर के लिए विशेष ट्रेन रवाना हुई थी। इसमें उदयपुर संभाग के 435 वरिष्ठ नागरिकों के साथ अजमेर और भरतपुर संभाग के यात्री भी शामिल थे। कुल 970 बुजुर्ग इस यात्रा पर गए थे।

यात्रा कार्यक्रम के मुताबिक, ट्रेन 12 अक्टूबर को गंगासागर पहुंची थी। इसके बाद कोलकाता में बेलूर मठ सहित अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने की योजना थी। यात्रा की वापसी 16 अक्टूबर को निर्धारित थी। यात्रियों की सहायता के लिए 30 कर्मचारियों का स्टाफ तैनात किया गया था। प्रत्येक कोच में दो सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी तय होने के साथ स्वास्थ्य सहायता के लिए एक डॉक्टर और दो नर्सिंगकर्मियों को भी भेजे जाने की जानकारी दी गई थी।

योजना के उद्देश्य पर उठे सवाल

सरकार की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना का उद्देश्य बुजुर्गों को धार्मिक स्थलों की यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में यात्रियों की ओर से लगाए गए आरोपों ने यात्रा प्रबंधन और सुविधाओं की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित विभाग और जिम्मेदार ठेकेदार का पक्ष सामने आना बाकी है। शिकायतों की आधिकारिक जांच और विभागीय प्रतिक्रिया से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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