जयपुर के Jaipur स्थित Jagatpura क्षेत्र में VIP मूवमेंट के दौरान हुई एक गंभीर घटना ने पूरे राजस्थान में राजनीतिक और प्रशासनिक बहस को तेज कर दिया है। यह मामला तब सामने आया जब मुख्यमंत्री के काफिले की सुरक्षा व्यवस्था के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा सड़क किनारे मोमोज का ठेला लगाने वाली महिला रेशु गुप्ता को हटाने की कोशिश की गई। इसी दौरान कथित तौर पर वह खौलते हुए पानी की चपेट में आ गईं और गंभीर रूप से झुलस गईं।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों में आक्रोश फैल गया। पीड़िता को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। इस घटना का मुद्दा सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई। विपक्षी दलों ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि VIP मूवमेंट के नाम पर आम और गरीब लोगों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस नेता सुनील शर्मा ने भी घटना की निंदा करते हुए पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की तथा सरकार से उचित मुआवजा और सख्त कार्रवाई की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस घटना को दुखद और निंदनीय बताते हुए कहा कि पीड़िता को तत्काल बेहतर इलाज और आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। वहीं कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर न्याय और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग रखी है।
इधर, राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है और पुलिस आयुक्त जयपुर, जिला मजिस्ट्रेट तथा डीसीपी ईस्ट से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने साफ किया है कि यदि किसी भी लोक सेवक की जिम्मेदारी पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आगामी सुनवाई 14 जुलाई को निर्धारित की गई है।
यह पूरा मामला एक बार फिर VIP मूवमेंट, सुरक्षा व्यवस्था और आम नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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