JDA के आधिकारिक टेंडर के मुताबिक प्रस्तावित सिस्टम का उद्देश्य जयपुर के ट्रैफिक प्रबंधन को तकनीक आधारित और अधिक प्रभावी बनाना है। टेंडर 29 सितंबर 2026 को जारी किया गया है और इसमें कंपनियां 6 नवंबर 2026 तक बोली जमा कर सकती हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत शहर के करीब 500 चौराहे और तिराहे स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से जोड़े जाने की योजना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें सिग्नल वाले और नॉन-सिग्नल वाले प्रमुख जंक्शन शामिल किए जाएंगे।
इस सिस्टम में कैमरों और सेंसर से मिलने वाले रियल-टाइम डेटा का इस्तेमाल ट्रैफिक की स्थिति को समझने और सिग्नल व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए किया जा सकेगा।
Adaptive Traffic Control System की खासियत यह होगी कि सड़क पर मौजूद ट्रैफिक की मात्रा के अनुसार सिग्नल टाइमिंग को एडजस्ट किया जा सकेगा। यानी जिस दिशा में वाहनों का दबाव ज्यादा होगा, वहां ट्रैफिक फ्लो को ध्यान में रखते हुए सिग्नल टाइमिंग को बदला जा सकेगा।
इससे पीक आवर्स के दौरान ट्रैफिक जाम को कम करने और चौराहों पर वाहनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग ने भी जयपुर में AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट के पायलट प्रोजेक्ट का उल्लेख किया है। विभाग के अनुसार रामबाग सर्किल समेत प्रमुख चौराहों पर AI आधारित तकनीक से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का पता लगाने और वाहन चालकों को अलर्ट करने की व्यवस्था का परीक्षण किया गया है।
प्रस्तावित स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम में कैमरों के जरिए ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की पहचान करने की क्षमता शामिल होगी। इसमें रेड लाइट जंप, ओवरस्पीड और रॉन्ग साइड ड्राइविंग जैसे उल्लंघनों की निगरानी की जा सकेगी।
इसके साथ ही बिना हेलमेट वाहन चलाने, सीट बेल्ट नहीं लगाने और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल जैसे मामलों की पहचान के लिए भी कैमरा आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
AI आधारित कैमरों के जरिए वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़ने और पहचानने की तकनीक भी सिस्टम का हिस्सा हो सकती है। इसके जरिए HSRP नंबर प्लेट से जुड़े मामलों और फैंसी नंबर प्लेट की पहचान में मदद मिल सकती है।
कैमरों से मिलने वाला डेटा सेंट्रल कमांड सेंटर तक पहुंचाया जाएगा, जहां ट्रैफिक की स्थिति की निगरानी और आवश्यक कार्रवाई के लिए सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम का एक अहम हिस्सा इमरजेंसी वाहनों को प्राथमिकता देना भी होगा। जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों के लिए ट्रैफिक सिग्नल को मैनेज कर ग्रीन कॉरिडोर उपलब्ध कराने में सिस्टम मदद कर सकता है।
इससे गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने या आग जैसी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड को घटनास्थल तक पहुंचने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिल सकती है।
JDA के आधिकारिक टेंडर में इस परियोजना की अनुमानित लागत 350 करोड़ रुपए है। चयनित मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर को ITMS और ATCS को डिजाइन, लागू करने के साथ-साथ 10 वर्षों तक ऑपरेट और मेंटेन करना होगा।
टेंडर की जानकारी के अनुसार प्री-बिड मीटिंग 8 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है, जबकि बोली जमा करने की अंतिम तारीख 6 नवंबर 2026 और बोली खोलने की तारीख भी 6 नवंबर 2026 निर्धारित है।
JDA की यह परियोजना लागू होने के बाद जयपुर में ट्रैफिक प्रबंधन पारंपरिक सिग्नल व्यवस्था से आगे बढ़कर डेटा और रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग पर आधारित हो सकेगा। JDA पहले से शहर में ट्रैफिक सिग्नल और ATCS के रखरखाव से जुड़े कार्य भी कराता रहा है।
फिलहाल यह परियोजना टेंडर प्रक्रिया में है। इसलिए 500 चौराहों पर पूरी व्यवस्था कब तक शुरू होगी और अंतिम रूप से कितने जंक्शन इस सिस्टम में शामिल किए जाएंगे, यह चयनित एजेंसी और परियोजना के कार्यान्वयन कार्यक्रम के बाद स्पष्ट होगा।
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