कानपुर: में सामने आए मोनी वर्मा हत्याकांड ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले का खुलासा जिस तरह हुआ, उसने पुलिस जांच की दिशा ही बदल दी। एक मामूली सा दिखने वाला शराब की बोतल का QR कोड इस पूरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने की सबसे अहम कड़ी बन गया।
पुलिस के मुताबिक, 15 अप्रैल को प्रयागराज-कानपुर हाईवे के पास कल्याणपुर गांव के समीप एक बक्से में बंद महिला का शव मिला था। जांच में मृतका की पहचान अमेठी निवासी 30 वर्षीय मोनी वर्मा के रूप में हुई।
मामले की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस ने मृतका के पति हर्ष खियानी उर्फ बिट्टू और उसके दोस्त यश गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि हर्ष एक कैब चालक है और मोनी उसकी दूसरी पत्नी थी। उसने तीन साल पहले चोरी-छिपे शादी की थी और उसे शारदा नगर में किराए के कमरे में रखता था, जबकि खुद पहली पत्नी के साथ अलग रहता था।
जांच में पता चला कि मोनी लगातार हर्ष पर दबाव बना रही थी कि वह उसे अपने परिवार के साथ घर ले जाए। इसी बात से परेशान होकर हर्ष ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।
वारदात वाले दिन उसने पहले से योजना बनाकर बाजार से बक्सा, दवाइयां और अन्य सामान खरीदा। मौका मिलते ही उसने मोनी को कमरे में गिराकर उसके दुपट्टे से गला घोंट दिया।

हत्या के बाद आरोपी ने अपने दोस्त यश गुप्ता को बुलाया और उसे पैसों का लालच देकर मदद के लिए राजी कर लिया। दोनों ने मिलकर शव को बक्से में बंद किया और कार में रखकर प्रयागराज की ओर निकल गए।
लौटते समय उन्होंने शव को हाईवे किनारे फेंक दिया और पहचान छिपाने के लिए मृतका का हैंडबैग भी झाड़ियों में फेंक दिया।
इस पूरे केस में सबसे अहम भूमिका उस QR कोड ने निभाई, जो मृतका के कपड़ों पर चिपका मिला था। जांच में पता चला कि यह कोड एक शराब की दुकान से जुड़ा हुआ है।
पुलिस ने उस दुकान के आसपास निगरानी बढ़ाई और सर्विलांस की मदद से संदिग्धों की पहचान शुरू की। इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने खोजरापुर गांव के पास वाहन चेकिंग के दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने मृतका का हैंडबैग बरामद किया, जिसमें उसके दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और मोबाइल फोन मिले। इसके अलावा हत्या में इस्तेमाल की गई कार और चार मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
इस केस को सुलझाने के लिए थाना पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीमों को लगाया गया था। सत्यनारायण प्रजापति ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों और सटीक रणनीति के चलते इस केस का खुलासा संभव हो पाया।
उन्होंने कहा कि छोटे से छोटे सुराग को भी नजरअंदाज नहीं किया गया, जिसकी वजह से आरोपी जल्द पकड़ में आ गए।
मोनी वर्मा हत्याकांड यह दिखाता है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से योजना बनाएं, लेकिन कानून के हाथ लंबे होते हैं। इस केस में एक छोटे से QR कोड ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया। यह घटना न केवल समाज के लिए चेतावनी है, बल्कि पुलिस की तकनीकी दक्षता का भी उदाहरण है।
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