उदयपुर के प्रतापनगर क्षेत्र के ढिकली गांव में एक घर के ट्यूबवेल चेंबर से 23 जहरीले सांपों के निकलने की घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया। सूचना मिलने पर वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर की टीम मौके पर पहुंची और देखा कि जिस एक सांप को पकड़ने के लिए बुलाया गया था, उसके साथ 22 नवजात सांप भी मौजूद थे। संभागीय अध्यक्ष और वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. चमन सिंह चौहान ने टीम के सदस्य लक्ष्मीलाल गमेती के साथ मौके पर पहुंचकर सावधानीपूर्वक चेंबर की जांच की। कुल 23 सांप निकाले गए, जिनमें एक मादा रसल वाइपर और 22 नवजात शामिल थे। सभी सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू कर आबादी क्षेत्र से दूर प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
डॉ. चमन सिंह ने बताया कि रसल वाइपर भारत के सबसे जहरीले सांपों में से एक है। यह प्रजाति अंडे नहीं देती, बल्कि सीधे बच्चों को जन्म देती है। इसका प्रजनन काल सामान्यतः नवंबर में होता है और मादा जून-जुलाई में बच्चों को जन्म देती है। इसी कारण मानसून से पहले ऐसे मामले अधिक देखने को मिलते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार पहली बारिश के बाद सांप अपने बिलों और सुरक्षित ठिकानों से बाहर निकलने लगते हैं। इसके चलते खेतों, बगीचों, ट्यूबवेल चेंबर, पत्थरों के ढेर, लकड़ी के भंडार और घरों के आसपास सांप दिखाई देने की संभावना बढ़ जाती है। यदि घर या खेत के आसपास कोई सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या मारने का प्रयास न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग या अधिकृत रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
एक वर्ष पूर्व जुलाई 2025 में भी उदयपुर शहर के सेवाश्रम इलाके में स्थित एक होटल के गार्डन में 18 कोबरा प्रजाति के छोटे सांपों का झुंड देखा गया था। वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर की टीम ने सभी सांपों को सावधानी से पकड़कर सुरक्षित रेस्क्यू किया और जंगल में छोड़ दिया। कोबरा एक बार में 12 से 20 अंडे देता है, और कभी-कभी अपने बच्चों को नुकसान भी पहुंचा देता है।
इस घटना ने यह स्पष्ट किया कि मानसून से पहले और बारिश के दौरान सांपों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, और ऐसे समय में सावधानी और सही रेस्क्यू उपाय बेहद आवश्यक हैं।
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