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वादा बनाम हकीकत! अशोक गहलोत का बड़ा आरोप— “नरेंद्र मोदी ने नहीं निभाया वादा, बंद हो गईं योजनाएं”

राजस्थान: की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं किया। गहलोत का कहना है कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद कांग्रेस की कई महत्वपूर्ण योजनाओं को या तो बंद कर दिया है या उनके नाम बदल दिए हैं।

जयपुर में महात्मा ज्योतिबा फुले को श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान चित्तौड़गढ़ में प्रधानमंत्री मोदी ने खुद उनका नाम लेकर कहा था कि कांग्रेस सरकार की कोई भी योजना बंद नहीं की जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

“वादे सिर्फ चुनाव तक सीमित रहे”

गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जनता को भरोसा दिलाया था कि सरकार बदलने के बावजूद योजनाएं जारी रहेंगी, लेकिन अब कई प्रोजेक्ट्स ठप पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने चुनाव जीतने के लिए बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन अब उन पर अमल नहीं हो रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि वे लगातार प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन न तो केंद्र सरकार कोई कदम उठा रही है और न ही राज्य सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।

सोशल सिक्योरिटी पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि लोगों को पेंशन नहीं मिल रही है और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। उनके मुताबिक, गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा परेशान है।

गहलोत ने कहा, “आज राजस्थान की जनता दुखी है। कई योजनाएं अधूरी पड़ी हैं और सरकार का ध्यान उन पर नहीं है। अगर सरकार सच में समाज के प्रति जिम्मेदार है, तो उसे सोशल सिक्योरिटी पर फोकस करना चाहिए।”

महात्मा फुले के विचारों का जिक्र

अपने बयान में गहलोत ने महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समाज सुधार के लिए दोनों ने ऐतिहासिक काम किए और आज की राजनीति को उनके आदर्शों से सीख लेनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर भी ज्योतिबा फुले को अपना गुरु मानते थे। ऐसे में आज की सरकारों को गरीब और वंचित वर्ग के लिए काम करना चाहिए।

सरकार पर काम न करने का आरोप

गहलोत ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार केवल दौरों में व्यस्त है और जमीनी स्तर पर काम नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को प्रदेश की वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए, अन्यथा जनता में असंतोष बढ़ेगा।

उनके अनुसार, “सरकार के पास समय है, लेकिन इच्छाशक्ति नहीं है। अगर योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाए तो प्रदेश की स्थिति बेहतर हो सकती है।”

राजनीतिक माहौल गरमाया

गहलोत के इस बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है, खासकर जब राज्य में चुनावी माहौल बन रहा हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं और वादों का मुद्दा हमेशा से चुनावी राजनीति का केंद्र रहा है और इस बार भी यह बड़ा मुद्दा बन सकता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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