पश्चिम बंगाल: विधानसभा चुनाव 2026 अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले सियासी हलचल चरम पर है। इस बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal का कोलकाता दौरा राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है। केजरीवाल शनिवार रात कोलकाता पहुंचे और उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख Mamata Banerjee के समर्थन में प्रचार करने का फैसला किया है।
केजरीवाल का यह दौरा सिर्फ एक चुनावी प्रचार नहीं, बल्कि विपक्षी एकता का मजबूत संकेत माना जा रहा है। INDIA गठबंधन के तहत विभिन्न दल भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरे हैं। इससे पहले झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren और बिहार के नेता Tejashwi Yadav भी ममता बनर्जी के समर्थन में प्रचार कर चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल की मौजूदगी खासकर शहरी मतदाताओं और मध्यम वर्ग पर असर डाल सकती है। दिल्ली और पंजाब में उनकी सरकार के कामकाज को उदाहरण के तौर पर पेश कर वह बंगाल के मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए यह दूसरा और अंतिम चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 29 अप्रैल को कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल की 142 सीटों पर मतदान होना है। इससे पहले 23 अप्रैल को हुए पहले चरण में रिकॉर्ड 92.88% मतदान दर्ज किया गया था, जो चुनावी उत्साह को दर्शाता है।
चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण में 152 सीटों पर वोटिंग हुई थी और अब दूसरे चरण में ही सरकार के गठन की दिशा लगभग तय हो जाएगी। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच माना जा रहा है। भाजपा ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृह मंत्री Amit Shah लगातार रैलियां कर रहे हैं।
भाजपा का दावा है कि पहले चरण में उसे बढ़त मिली है और दूसरे चरण में वह इस बढ़त को और मजबूत करेगी। वहीं, भाजपा नेताओं ने केजरीवाल पर भी निशाना साधा है और उनकी नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान को लेकर कानूनी कार्रवाई करने का ऐलान किया है। ममता ने कहा कि इस तरह की भाषा एक केंद्रीय मंत्री को शोभा नहीं देती और यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि भाजपा का डराने वाला तरीका बंगाल के मतदाताओं पर असर नहीं डालेगा। ममता बनर्जी लगातार राज्य के अधिकारों और संघीय ढांचे की बात उठा रही हैं, जिसे विपक्षी दलों का भी समर्थन मिल रहा है।
केजरीवाल के दौरे का एक बड़ा उद्देश्य कोलकाता और आसपास के शहरी इलाकों में मतदाताओं को साधना है। माना जा रहा है कि वह मतदाता सूची संशोधन (SIR) और शहरी विकास जैसे मुद्दों को उठाकर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे।
उनकी रणनीति मध्यम वर्ग, पेशेवरों और युवा वोटर्स को जोड़ने पर केंद्रित होगी, जो चुनावी परिणामों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले 29 अप्रैल का मतदान राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा। सभी दलों के लिए यह चरण निर्णायक साबित हो सकता है।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 अब अपने अंतिम और सबसे अहम चरण में प्रवेश कर चुका है। केजरीवाल का कोलकाता दौरा विपक्षी एकजुटता को मजबूती देता है, वहीं भाजपा भी पूरी ताकत से मैदान में है। 29 अप्रैल का मतदान और 4 मई के नतीजे यह तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।
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