राजस्थान: की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस नेता सचिन पायलट को लेकर बड़ा बयान देते हुए साफ कहा कि “पायलट हमें छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे, उनकी दोनों टांगें कांग्रेस में हैं और यहीं रहेंगी।” इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।
जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि सचिन पायलट अब समझ चुके हैं कि पहले जो गलती हुई थी, उसके क्या परिणाम होते हैं। उन्होंने कहा, “जो लोग पहले गुमराह करके हमारे विधायकों को मानेसर ले गए थे, उनकी मंशा अब सफल नहीं होगी। पायलट को अनुभव हो गया है और अब वे संभल भी गए हैं।”
दरअसल, यह बयान उस समय आया जब बीजेपी के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने टोंक में पायलट पर तंज कसते हुए उन्हें “बहुरूपिया” बताया था। उन्होंने कहा था कि पायलट की एक टांग कांग्रेस में है और दूसरी कहीं और।
गहलोत ने इस बयान का जवाब देते हुए न सिर्फ पायलट का बचाव किया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि कांग्रेस में अब एकजुटता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पूरी पार्टी पायलट के साथ है और भविष्य में कोई मतभेद नहीं होगा।
गहलोत के बयान का सबसे अहम हिस्सा 2020 के चर्चित ‘मानेसर कांड’ का जिक्र रहा। जुलाई 2020 में सचिन पायलट खेमे के विधायकों ने बगावत कर हरियाणा के मानेसर में डेरा डाल दिया था, जिससे राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर संकट आ गया था।
मानेसर कांड 2020 को याद करते हुए गहलोत ने कहा कि उस घटना से सभी को सबक मिला है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, गहलोत द्वारा बार-बार इस मुद्दे को उठाना एक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिससे पार्टी के अंदर अपनी पकड़ मजबूत रखी जा सके।
दिलचस्प बात यह है कि अगस्त 2020 में जब पायलट खेमे की वापसी हुई थी, तब गहलोत ने “फॉरगेट एंड फॉरगिव” यानी भूलो और माफ करो की बात कही थी। उस समय उन्होंने संकेत दिया था कि पार्टी अब पुराने विवादों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ेगी।
हालांकि, समय-समय पर गहलोत और उनके समर्थक नेता मानेसर कांड का जिक्र करते रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस के अंदर की राजनीति पूरी तरह शांत नहीं हुई है।
गहलोत के इस बयान को कई राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। एक ओर यह पायलट के प्रति समर्थन का संकेत है, तो दूसरी ओर यह उनके पुराने कदमों की याद दिलाकर एक संदेश भी देता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान कांग्रेस के अंदर संतुलन बनाए रखने की कोशिश हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब बीजेपी लगातार पार्टी के भीतर फूट का मुद्दा उठाती रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजर सचिन पायलट की प्रतिक्रिया पर टिकी है। वे इस बयान पर क्या कहते हैं, इससे आगे की सियासत का रुख तय हो सकता है।
अगर पायलट सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं, तो यह कांग्रेस में एकजुटता का संकेत होगा। वहीं, अगर वे चुप रहते हैं या अलग रुख अपनाते हैं, तो इससे नए राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।
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