मिडिल-ईस्ट: में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए ईरान को खुली चेतावनी दी है। राइफल के साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा—“अब ज्यादा नरमी नहीं बरती जाएगी।” इस बयान ने न सिर्फ कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वे राइफल के साथ नजर आ रहे हैं। तस्वीर पर लिखा था—“No More Mr. Nice Guy।” इस संदेश को सीधे तौर पर ईरान के लिए चेतावनी माना जा रहा है। ट्रम्प ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ईरान स्थिति को संभालने में असफल हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सार्वजनिक चेतावनी कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इससे हालात और बिगड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोर्चा खोल दिया है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने ‘मैजेस्टिक’ और ‘टिफनी’ नामक जहाजों को कब्जे में लेकर करीब 38 लाख बैरल तेल जब्त किया है। उन्होंने इसे “समुद्री डकैती” करार दिया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है।
ईरान का कहना है कि इस कार्रवाई से वैश्विक व्यापार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और यदि इसे रोका नहीं गया, तो यह एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी।

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत पहले ही धीमी थी, लेकिन अब ट्रम्प के बयान और ईरान की शिकायत के बाद स्थिति और जटिल हो गई है। ट्रम्प ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि जल्द कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका और सख्त कदम उठा सकता है।
इस तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें लगातार सातवें दिन बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका है।
इसके अलावा, युद्ध जैसे हालात के कारण ईरान में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में अब तक करीब 10 लाख नौकरियां खत्म हो चुकी हैं, जबकि आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संयुक्त अरब अमीरात ने ओपेक से अलग होने का ऐलान कर दिया है, जो वैश्विक तेल राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री लगातार क्षेत्रीय दौरों पर हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि देश कूटनीतिक समर्थन जुटाने में लगा हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद ईरान में कई लोगों को फांसी दी गई है और हजारों गिरफ्तारियां हुई हैं। इसके अलावा, देश में जरूरी दवाओं की भारी कमी हो गई है। कैंसर, अस्थमा और मिर्गी जैसी बीमारियों की दवाएं या तो उपलब्ध नहीं हैं या उनकी कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह तनाव बड़े संघर्ष में बदल सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच पहले भी कई बार टकराव की स्थिति बन चुकी है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प की सख्त चेतावनी और ईरान की संयुक्त राष्ट्र में शिकायत ने वैश्विक राजनीति को एक बार फिर अस्थिर कर दिया है। जहां एक ओर कूटनीतिक बातचीत की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर बढ़ते बयानबाजी से हालात और बिगड़ने का खतरा बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाते हैं या टकराव और गहरा होता है।
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