रूस के कामचटका प्रायद्वीप में शुक्रवार, 16 अक्टूबर को आए भूकंप के बाद जापान में भूकंप की चेतावनी को लेकर अफरातफरी मच गई। रूस में आए भूकंप की तीव्रता करीब 7 मापी गई, जबकि जापान की मौसम एजेंसी ने गलती से 9.9 तीव्रता के भूकंप का अलर्ट जारी कर दिया। इस चेतावनी के बाद मोबाइल फोन और सार्वजनिक चेतावनी प्रणालियों पर अलार्म बजने लगे। हालांकि, एजेंसी ने करीब आठ मिनट बाद अलर्ट वापस ले लिया और अपनी गलती के लिए माफी मांगी।
जापान मौसम एजेंसी (JMA) ने स्थानीय समय के अनुसार शुक्रवार दोपहर करीब 12:40 बजे आपातकालीन भूकंप चेतावनी जारी की। इसमें उत्तरी, पूर्वी और मध्य जापान के कई क्षेत्रों में तेज झटके आने की आशंका जताई गई थी। चेतावनी में भूकंप की तीव्रता 9.9 बताई गई, जो अब तक दर्ज किए गए सबसे शक्तिशाली भूकंपों से भी अधिक होती।
अलर्ट जारी होने के बाद लोगों के मोबाइल फोन पर आपातकालीन संदेश आए और सार्वजनिक लाउडस्पीकरों से चेतावनी दी गई। संभावित खतरे को देखते हुए लोगों में चिंता फैल गई। लेकिन कुछ ही मिनटों बाद एजेंसी ने चेतावनी रद्द कर दी।
यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप केंद्र (EMSC) के अनुसार, रूस के कामचटका प्रायद्वीप में आए भूकंप की तीव्रता करीब 7 थी। जापान की मौसम एजेंसी ने बाद में वास्तविक भूकंप की तीव्रता 6.9 बताई।
जापान में इस घटना के बाद बड़े झटके महसूस नहीं किए गए। होक्काइडो के हाकोदाते शहर में अधिकतम तीव्रता का स्तर केवल 1 दर्ज किया गया। इस घटना के बाद सुनामी की कोई चेतावनी या सलाह भी जारी नहीं की गई।
जापान की भूकंप चेतावनी प्रणाली जमीन पर लगे भूकंपीय सेंसरों से मिले शुरुआती आंकड़ों के आधार पर भूकंप के केंद्र, तीव्रता और संभावित प्रभाव का अनुमान लगाती है। यह प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाती है, ताकि लोगों को समय रहते चेतावनी मिल सके।
इस मामले में सिस्टम ने भूकंप के केंद्र का गलत अनुमान लगाया और उसकी तीव्रता वास्तविक स्तर से काफी अधिक बताई। शुरुआती जांच में कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की प्रोसेसिंग में गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। एजेंसी ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और साइबर हमले के कोई संकेत नहीं मिले हैं।
दुनिया में आधुनिक उपकरणों से दर्ज किया गया सबसे शक्तिशाली भूकंप 1960 में चिली में आया था, जिसकी तीव्रता 9.5 मापी गई थी। ऐसे में 9.9 तीव्रता का अलर्ट जारी होना बेहद गंभीर खतरे का संकेत था।
हालांकि, जापान में इस बार ऐसा कोई भूकंप नहीं आया। गलत चेतावनी ने आपातकालीन सूचना प्रणाली की सटीकता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जापान जैसे भूकंप संभावित देश में समय पर और सही चेतावनी देना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का मौका मिलता है।
रूस का कामचटका प्रायद्वीप प्रशांत महासागर के उस क्षेत्र में स्थित है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह इलाका टेक्टोनिक प्लेटों की सक्रिय हलचल के कारण भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
यहां प्रशांत प्लेट दूसरी प्लेटों के नीचे खिसकती है। इस प्रक्रिया को सबडक्शन कहा जाता है। प्लेटों के बीच दबाव जमा होने और अचानक निकलने से भूकंप आते हैं। समुद्र के नीचे शक्तिशाली भूकंप आने पर सुनामी का खतरा भी पैदा हो सकता है।
जुलाई 2025 में भी कामचटका क्षेत्र में 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसके बाद प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में सुनामी संबंधी चेतावनियां जारी की गई थीं।
फिलहाल, जापान की मौसम एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि शुरुआती आंकड़ों के आधार पर इतनी बड़ी गलत चेतावनी कैसे जारी हुई। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तेज चेतावनी के साथ-साथ आंकड़ों की सटीकता भी कितनी महत्वपूर्ण है।
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