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केरल इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल में बोले थरूर— नेहरू को बलि का बकरा बना रही है मोदी सरकार, आलोचना और नफरत में फर्क जरूरी

तिरुवनंतपुरम/कोच्चि। कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर बड़ा बयान दिया है। थरूर ने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन देश की हर समस्या के लिए उन्हें अकेले जिम्मेदार ठहराना न सिर्फ गलत बल्कि पूरी तरह अनुचित है।

केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) के चौथे संस्करण में बोलते हुए थरूर ने साफ शब्दों में कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि मोदी सरकार लोकतंत्र-विरोधी है, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू-विरोधी हैं। नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना दिया गया है।”

उन्होंने कहा कि वे नेहरू के विचारों और उनके दृष्टिकोण के गहरे प्रशंसक हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनकी हर नीति और निर्णय का बिना सवाल किए समर्थन किया जाए। थरूर के अनुसार, आलोचना और नकारात्मक राजनीति में फर्क समझना जरूरी है।

भारतीय लोकतंत्र के संस्थापक थे नेहरू
थरूर ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू भारतीय लोकतंत्र के संस्थापक थे। उन्होंने स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव रखी और उन्हें मजबूती दी। ऐसे में आज की हर समस्या का दोष उनके सिर मढ़ देना इतिहास और तथ्यों के साथ अन्याय है।

लेखक जीवन और किताबों से रिश्ता
कार्यक्रम के दौरान थरूर ने अपने लेखक जीवन के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि बचपन में अस्थमा की बीमारी के कारण वे घर में ज्यादा समय बिताते थे और किताबें ही उनकी सबसे करीबी दोस्त बन गईं। उस दौर में न टीवी था और न मोबाइल, इसलिए पढ़ने और लिखने की आदत स्वाभाविक रूप से विकसित हुई।

उन्होंने बताया कि उनका पहला उपन्यास बहुत कम उम्र में लिखा गया था, लेकिन स्याही गिरने से वह नष्ट हो गया। श्री नारायना गुरु की जीवनी उनकी 28वीं पुस्तक है।

थरूर ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ने की संस्कृति कमजोर हो रही है, लेकिन केरल आज भी किताबों और साहित्य के मामले में अग्रणी है।

युवा पीढ़ी को दिया संदेश
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में छोटी और कम पन्नों वाली किताबें ज्यादा प्रभावशाली हो सकती हैं, क्योंकि लोगों के पास पढ़ने के लिए सीमित समय है। उन्होंने बताया कि 1989 में उन्होंने The Great Indian Novel इसलिए लिखी क्योंकि उस समय भारत में व्यंग्य साहित्य लगभग न के बराबर था।

पहले भी चर्चा में रहे बयान
गौरतलब है कि इससे पहले 1 जनवरी को भी शशि थरूर ने कहा था कि वे कभी पार्टी लाइन से नहीं भटके हैं। उन्होंने साफ किया था कि विभिन्न मुद्दों पर राय रखना पार्टी छोड़ना नहीं होता और वे पिछले 17 सालों से कांग्रेस में मजबूती से जुड़े हुए हैं।

निष्कर्ष:
शशि थरूर का यह बयान एक बार फिर नेहरू विरासत और मौजूदा राजनीति के टकराव को केंद्र में ले आया है। उन्होंने जहां नेहरू की आलोचना को स्वीकार करने की बात कही, वहीं मोदी सरकार पर इतिहास को चुनिंदा तरीके से पेश करने का आरोप भी लगाया। यह बयान आने वाले दिनों में सियासी बहस को और तेज कर सकता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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