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अयोध्या में इतिहास रचा गया! राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भव्य स्वागत, ‘नगर की चाबी’ से सम्मान और श्रीराम यंत्र की दिव्य प्रतिष्ठापना

चैत्र नवरात्रि: के प्रथम दिन अयोध्या में ऐसा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। द्रौपदी मुर्मू के रामनगरी आगमन को लेकर शहर में अभूतपूर्व उत्साह और भव्यता देखने को मिली। यह केवल एक आधिकारिक दौरा नहीं था, बल्कि सनातन परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव बन गया।

भव्य स्वागत और ‘नगर की चाबी’ का सम्मान

राष्ट्रपति का आगमन महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हुआ, जहां आनंदीबेन पटेल और योगी आदित्यनाथ ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने राष्ट्रपति को ‘नगर की चाबी’ भेंट कर सम्मानित किया। यह सम्मान किसी भी अतिथि को नगर की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च प्रतीकात्मक सम्मान माना जाता है। इस क्षण ने आयोजन को और भी गौरवपूर्ण बना दिया।

रामनगरी में सांस्कृतिक उत्सव का अद्भुत नजारा

जैसे ही राष्ट्रपति का काफिला एयरपोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की ओर बढ़ा, पूरा मार्ग उत्सव में बदल गया। करीब 20 स्थानों पर बनाए गए सांस्कृतिक मंचों पर लगभग 250 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

रामायण के प्रसंगों पर आधारित झांकियां, भजन-कीर्तन, अवधी और भोजपुरी लोकनृत्य, ढोल-नगाड़े और शंखनाद ने पूरे मार्ग को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। सड़क के दोनों ओर खड़े श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और जयकारों के साथ राष्ट्रपति का स्वागत किया।

यह दृश्य केवल स्वागत का नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सजीव प्रदर्शन था।

श्रीराम यंत्र की ऐतिहासिक प्रतिष्ठापना

मंदिर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की विधिवत प्रतिष्ठापना की। यह अनुष्ठान चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ मुहूर्त में सम्पन्न हुआ, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

श्रीराम यंत्र एक विशेष वैदिक ज्यामितीय संरचना है, जिसमें भगवान श्रीराम सहित विभिन्न देवी-देवताओं की ऊर्जा को मंत्रों और आकृतियों के माध्यम से स्थापित किया जाता है। इसे सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है।

इस यंत्र को दक्षिण भारत से विशेष रूप से अयोध्या लाया गया था और इसकी प्रतिष्ठापना से पहले नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान भी आयोजित किए गए थे। इस अवसर पर अनेक संत, आचार्य और ट्रस्ट के सदस्य उपस्थित रहे।

रामलला के दर्शन और आध्यात्मिक अनुभव

राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने मिलकर रामलला के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए वहां की भव्य वास्तुकला और दीवारों पर उकेरी गई धार्मिक आकृतियों का अवलोकन भी किया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या की पवित्र भूमि पर कदम रखना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने भगवान राम के आदर्शों को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और देश की प्रगति के लिए उनकी प्रेरणा को महत्वपूर्ण बताया।

सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश

इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक समरसता का संदेश भी रहा। राम मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रमों में विभिन्न वर्गों के लोगों की भागीदारी ने यह दर्शाया कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम भी है।

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत शांति और आध्यात्मिकता का केंद्र बन रहा है। उन्होंने इसे “नए भारत” की पहचान बताया, जहां आस्था और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।

अयोध्या का सौंदर्यीकरण और प्रशासनिक तैयारी

राष्ट्रपति के आगमन को लेकर अयोध्या को पूरी तरह से सजाया गया था। नगर निगम, प्रशासन और पुलिस ने मिलकर शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया।

सड़कों की सफाई, घाटों की धुलाई, विशेष प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों ने पूरे आयोजन को भव्य और सफल बनाया। यह तैयारी केवल एक दिन के कार्यक्रम के लिए नहीं, बल्कि अयोध्या को वैश्विक धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


निष्कर्ष

अयोध्या में राष्ट्रपति का यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव का संगम बन गया। श्रीराम यंत्र की स्थापना और भव्य स्वागत समारोह ने यह साबित कर दिया कि भारत अपनी परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़ते हुए एक नई पहचान बना रहा है।

यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक एकता, आध्यात्मिक शक्ति और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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