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चुनावी विज्ञापन पर सख्ती! बिना सर्टिफिकेट सोशल मीडिया-टीवी पर एड नहीं, आयोग का बड़ा आदेश

आगामी विधानसभा: चुनावों से पहले Election Commission of India ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। अब किसी भी तरह के राजनीतिक विज्ञापन को टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित करने से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) से प्रमाणन लेना अनिवार्य होगा।

आयोग के इस फैसले को चुनावी पारदर्शिता बढ़ाने और फेक न्यूज पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

बिना सर्टिफिकेट नहीं चलेगा कोई एड

चुनाव आयोग के अनुसार, बिना MCMC की मंजूरी के कोई भी राजनीतिक विज्ञापन जारी नहीं किया जा सकेगा। यह नियम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी समान रूप से लागू होगा।

इसमें टीवी, रेडियो, सार्वजनिक स्थानों पर ऑडियो-वीडियो डिस्प्ले, ई-पेपर, बल्क SMS, वॉयस मैसेज, इंटरनेट और सोशल मीडिया जैसे सभी माध्यम शामिल हैं।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह नियम आगामी चुनावों में लागू होगा, जिसमें असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ छह राज्यों में होने वाले उपचुनाव भी शामिल हैं।

पेड न्यूज और फेक कंटेंट पर कड़ी नजर

चुनाव आयोग ने MCMC को निर्देश दिए हैं कि वे पेड न्यूज और भ्रामक कंटेंट पर कड़ी निगरानी रखें। यदि किसी भी उम्मीदवार या पार्टी द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फेक न्यूज और दुष्प्रचार को रोकने के लिए आयोग ने 19 मार्च को सोशल मीडिया कंपनियों और चुनावी राज्यों के अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक भी की। इस बैठक में चुनाव के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने पर चर्चा हुई।

सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी अनिवार्य

आयोग ने उम्मीदवारों के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अब सभी उम्मीदवारों को नामांकन के समय अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देना अनिवार्य होगा।

इस कदम का उद्देश्य चुनावी प्रचार में पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि सभी डिजिटल गतिविधियों की निगरानी की जा सके।

खर्च का पूरा हिसाब देना होगा

चुनाव आयोग ने खर्च से जुड़े नियमों को भी सख्त किया है। Representation of the People Act, 1951 की धारा 77(1) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव समाप्त होने के 75 दिनों के भीतर अपने खर्च का पूरा विवरण देना होगा।

इसमें न केवल पारंपरिक प्रचार खर्च शामिल होगा, बल्कि सोशल मीडिया विज्ञापन, कंटेंट प्रोडक्शन और डिजिटल अकाउंट संचालन पर होने वाला खर्च भी दर्ज करना अनिवार्य होगा।

क्यों जरूरी है यह फैसला?

डिजिटल युग में सोशल मीडिया चुनाव प्रचार का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे में फेक न्यूज, भ्रामक जानकारी और बिना नियंत्रण के प्रचार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग का यह कदम चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा। साथ ही, यह सुनिश्चित करेगा कि सभी पार्टियां एक समान नियमों का पालन करें।

राजनीतिक दलों पर बढ़ेगा दबाव

इन नए नियमों के लागू होने के बाद राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को अपने हर विज्ञापन और प्रचार सामग्री के लिए पहले से योजना बनानी होगी।

इसके अलावा, डिजिटल टीमों और सोशल मीडिया कैंपेन पर भी कड़ी निगरानी रखनी होगी, ताकि कोई भी कंटेंट बिना प्रमाणन के जारी न हो।

चुनाव आयोग का यह निर्णय चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। MCMC सर्टिफिकेशन अनिवार्य करने से फेक न्यूज और अनियंत्रित प्रचार पर लगाम लगेगी, जिससे मतदाताओं को सही और प्रमाणित जानकारी मिल सकेगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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