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उदयपुर में ‘भूत’ बनकर युवक सड़कों पर घूमता रहा! 50 साल पुरानी परंपरा ने खींचा हजारों का ध्यान

राजस्थान: के Udaipur में इन दिनों Gangaur Festival की धूम देखने को मिल रही है, लेकिन इस बार एक अनोखी और रहस्यमयी परंपरा ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। गणगौर से एक दिन पहले भोईवाड़ा क्षेत्र में आयोजित ‘दातन हेला’ कार्यक्रम में ‘भूत’ की डरावनी झांकी ने हजारों लोगों को आकर्षित किया।

‘भूत’ की झांकी बनी मुख्य आकर्षण

भोईवाड़ा में माली समाज की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में एक युवक को ‘भूत’ का रूप दिया गया। उसे रस्सियों से मजबूती से बांधकर पूरे मोहल्ले की गलियों में घुमाया गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक माहौल के बीच यह दृश्य बेहद रोमांचक और जीवंत नजर आया।

स्थानीय मान्यता के अनुसार इस ‘भूत’ को ‘भोलेनाथ की चेली’ माना जाता है और इसकी पूजा भी की जाती है। इसे देखने के लिए आसपास के इलाकों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचे।

50 साल पुरानी परंपरा आज भी जिंदा

यह परंपरा पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही है। हर साल गणगौर से पहले इस अनोखे आयोजन को उसी उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।

स्थानीय निवासी रवि माली बताते हैं कि वे बचपन से इस परंपरा को देखते आ रहे हैं और अब नई पीढ़ी भी इसे पूरी लगन से आगे बढ़ा रही है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुका है।

घर-घर जाता है ‘भूत’, मिलता है सम्मान

इस परंपरा का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ‘भूत’ बना युवक हर घर के दरवाजे तक जाता है। लोग उसे देखकर डरते नहीं, बल्कि बड़े प्रेम से उसका स्वागत करते हैं। उसे खाने-पीने की चीजें दी जाती हैं और सम्मानपूर्वक विदा किया जाता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रतीकात्मक झांकी से क्षेत्र की नकारात्मक ऊर्जा, बीमारियां और बुरी शक्तियां दूर होती हैं। नए साल की शुरुआत में इस तरह के आयोजन से पूरे इलाके में सकारात्मक माहौल बनता है।

ढोल-नगाड़ों के बीच गूंजा मोहल्ला

जब ‘दातन हेला’ की झांकी निकली तो भोईवाड़ा की तंग गलियां ढोल-नगाड़ों की आवाज से गूंज उठीं। इस दौरान भांग और भुजिया का प्रसाद भी बांटा गया। हर गली में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और माहौल उत्सवमय हो गया।

इस आयोजन में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। खासतौर पर युवाओं में इस परंपरा को लेकर खास उत्साह देखने को मिला।

चार दिन चलेगी शाही सवारी

स्थानीय निवासी नीरज माली के अनुसार, गणगौर उत्सव का मुख्य आकर्षण अभी बाकी है। शनिवार शाम से भव्य शाही सवारी की शुरुआत होगी, जो अगले चार दिनों तक पूरे शहर में निकाली जाएगी।

इस दौरान महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सज-धजकर सिर पर गणगौर माता की प्रतिमा रखकर गणगौर घाट तक जाएंगी। वहां Lake Pichola के किनारे लोक गीतों और पूजा-अर्चना के साथ यह आयोजन संपन्न होगा।

मेवाड़ की जीवंत संस्कृति की झलक

उदयपुर की यह परंपरा मेवाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। यहां के लोग आज भी अपनी पुरानी परंपराओं को पूरे सम्मान और गर्व के साथ निभा रहे हैं।

‘भूत’ की यह झांकी भले ही डरावनी लगे, लेकिन इसके पीछे की भावना पूरी तरह सकारात्मक है—समाज से बुराई को दूर करना और खुशहाली लाना।


निष्कर्ष

Udaipur का ‘दातन हेला’ आयोजन यह साबित करता है कि भारत की पारंपरिक संस्कृति कितनी विविध और अनोखी है। ‘भूत’ की झांकी के जरिए समाज में सकारात्मकता और एकता का संदेश दिया जाता है। Gangaur Festival के इस खास आयोजन ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि मेवाड़ की परंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत हैं जितनी दशकों पहले थीं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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