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450+ जंगली जानवरों की रक्षक अनीता बनीं हीरो: जयपुर में मिला बड़ा सम्मान, ‘बर्ड विलेज’ मेनार भी चर्चा में

जयपुर: में आयोजित ‘मछली एवं वन्य प्राणी मित्र पुरस्कार’ के छठे संस्करण में इस बार वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कई अधिकारियों और स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रभा खेतान फाउंडेशन (PKF) और WWF-India के संयुक्त तत्वावधान में शहर के प्रतिष्ठित ITC Rajputana होटल में किया गया।

इस समारोह का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को सम्मानित करना है, जिन्होंने वन्यजीव संरक्षण, बचाव कार्य और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। कार्यक्रम में विभिन्न वन क्षेत्रों में कार्यरत फॉरेस्ट गार्ड्स, रेस्क्यू टीमों और पर्यावरण प्रेमियों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया।

450 से ज्यादा जानवरों को बचाने वाली अनीता बनीं प्रेरणा

इस वर्ष का सबसे चर्चित नाम शेरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की फॉरेस्ट गार्ड अनीता कुमारी रहीं, जिन्होंने अब तक 450 से अधिक जंगली जानवरों को सुरक्षित बचाने में अहम भूमिका निभाई है। उनके साहस, समर्पण और त्वरित निर्णय क्षमता ने उन्हें इस क्षेत्र में एक मिसाल बना दिया है।

अनीता कुमारी ने कई बार जोखिम भरे हालातों में फंसे जानवरों को बचाया और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। उनके काम ने न केवल वन्यजीवों की जान बचाई, बल्कि स्थानीय समुदायों में भी जागरूकता बढ़ाने का काम किया।

रेस्क्यू टीम को मिला ‘मछली पुरस्कार’

उदयपुर की वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम—सीताराम मीणा, अजीत सिंह राणावत, जितेंद्र सिंह, द्वारका प्रसाद शर्मा और अशोक नारायण जोशी—को ‘मछली पुरस्कार’ से नवाजा गया। इनकी टीम ने बड़ी संख्या में घायल और संकटग्रस्त जानवरों को बचाकर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया है।

इनके प्रयासों ने यह साबित किया है कि यदि सही समय पर कार्रवाई की जाए, तो मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

वन अधिकारियों का भी अहम योगदान

बूंदी स्थित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व की फॉरेस्ट गार्ड सरोज कंवर को भी उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने स्थानीय समुदायों के साथ तालमेल बनाकर मानव-वन्यजीव संघर्ष को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वहीं कैलादेवी वन्यजीव अभयारण्य के तकनीशियन रामलाल गुर्जर ने जंगलों में निगरानी रखकर अवैध शिकार और पेड़ों की कटाई को रोकने में उल्लेखनीय योगदान दिया।

मेनार बना ‘बर्ड विलेज’, संरक्षण की मिसाल

इस आयोजन में मेनार गांव को ‘बर्ड विलेज’ के रूप में विकसित करने के प्रयासों की भी सराहना की गई। मेनार आज प्रवासी पक्षियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन चुका है, जहां हर साल हजारों की संख्या में पक्षी आते हैं।

यह पहल स्थानीय समुदाय और पर्यावरण प्रेमियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है, जिसने इस गांव को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मेनार का मॉडल अब अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।

संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने युवाओं को इस दिशा में आगे आने और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

इस तरह के सम्मान समारोह न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी देते हैं कि पर्यावरण और वन्यजीवों की रक्षा हमारी साझा जिम्मेदारी है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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