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अब किसान तक पहुंचेगी ‘सीधी तकनीक’! लालसोट में शुरू हुआ देसी डिप्लोमा कोर्स, बदल जाएगी खेती की तस्वीर

राजस्थान: के दौसा जिले के लालसोट से खेती-किसानी से जुड़ी एक अहम पहल सामने आई है। यहां कृषि महाविद्यालय में ‘डिप्लोमा इन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन सर्विसेज फॉर इनपुट डीलर्स’ (DESI) कोर्स की शुरुआत की गई है। इस पहल का मकसद किसानों तक वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी को ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।

शुक्रवार, 27 मार्च को आयोजित कार्यक्रम में इस कोर्स का औपचारिक शुभारंभ किया गया। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम खेती के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है।


इनपुट डीलर्स को बनाया जाएगा तकनीकी रूप से सक्षम

कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि महाविद्यालय लालसोट के अधिष्ठाता प्रोफेसर डी.के. यादव ने की।

मुख्य अतिथि के रूप में दौसा कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक रामराज मीणा और विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि विज्ञान केंद्र दौसा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. बी.एल. जाट मौजूद रहे।

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि किसान अक्सर सबसे पहले इनपुट डीलर्स से सलाह लेते हैं। ऐसे में उनका तकनीकी रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है।


किसानों तक सीधे पहुंचेगी वैज्ञानिक जानकारी

संयुक्त निदेशक रामराज मीणा ने कहा कि यह कोर्स किसानों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

उन्होंने बताया कि कई बार गलत सलाह या अधूरी जानकारी के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। इस पहल से इस समस्या को कम किया जा सकेगा।

वहीं, डॉ. बी.एल. जाट ने प्रतिभागियों से अपील की कि वे इस प्रशिक्षण से मिली जानकारी को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाएं।


एक साल का होगा प्रशिक्षण, फील्ड विजिट भी शामिल

कृषि महाविद्यालय के विशेषज्ञों के अनुसार, यह डिप्लोमा कोर्स एक साल की अवधि का होगा।

इस दौरान प्रतिभागियों को कुल 80 सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा 8 फील्ड विजिट भी करवाई जाएंगी, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव मिल सके।

इस कोर्स में कुल 39 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है, जो आने वाले समय में किसानों के लिए तकनीकी मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं।


खेती में आएगा बदलाव, बढ़ेगी उत्पादकता

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम खेती की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने में मददगार साबित होंगे।

जब इनपुट डीलर्स वैज्ञानिक तरीके से किसानों को मार्गदर्शन देंगे, तो फसल उत्पादन बेहतर होगा और नुकसान की संभावना भी कम होगी।

इसके साथ ही आधुनिक तकनीकों के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।


तकनीकी ट्रांसफर में अहम भूमिका

डॉ. दिनेश कुमार यादव ने बताया कि यह कोर्स तकनीकी ट्रांसफर को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि यह पहल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना है, जो किसानों और वैज्ञानिकों के बीच की दूरी को कम करे।

इससे खेती में नई तकनीकों को अपनाना आसान होगा।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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