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जयपुर में अचानक बंद होगा स्कूल? फीस भर चुके पेरेंट्स का फूटा गुस्सा, प्रबंधन के दावे से बढ़ा सस्पेंस

राजस्थान: की राजधानी जयपुर में एक निजी स्कूल को लेकर अचानक विवाद खड़ा हो गया है। श्याम नगर स्थित द ट्री हाउस स्कूल के बंद होने की खबर फैलते ही बुधवार को अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में पेरेंट्स स्कूल परिसर पहुंचे और प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

मामला तब गरमाया जब अभिभावकों को जानकारी मिली कि स्कूल को स्थायी रूप से बंद किया जा सकता है। जबकि नया शैक्षणिक सत्र अभी-अभी शुरू हुआ है और अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों की फीस पहले ही जमा कर चुके हैं। इस अचानक आई सूचना ने पेरेंट्स को चिंता और असमंजस में डाल दिया।

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने पहले सिर्फ एक दिन के लिए स्कूल बंद रखने की बात कही थी, जिसमें बोरिंग और निर्माण कार्य का हवाला दिया गया था। लेकिन बाद में अचानक स्कूल बंद होने की खबर सामने आई। इससे पेरेंट्स खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

एक अभिभावक तमन्ना वैष्णव ने बताया कि उन्होंने 60 से 75 हजार रुपये तक की फीस जमा की है। इसके अलावा यूनिफॉर्म और किताबों पर भी हजारों रुपये खर्च किए गए हैं। अब अगर स्कूल बंद होता है, तो बच्चों का एडमिशन दूसरे स्कूल में करवाना न सिर्फ मुश्किल होगा बल्कि आर्थिक रूप से भी भारी पड़ेगा।

स्कूल में वर्तमान में लगभग 180 छात्र पढ़ रहे हैं, जिनमें से करीब 45 बच्चों का एडमिशन राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत हुआ है। ऐसे में इन बच्चों के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को फीस रिफंड और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) देने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, पेरेंट्स ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को किसी अन्य स्कूल में शिफ्ट नहीं करना चाहते, खासकर तब जब सेशन शुरू हो चुका है।

अभिभावकों ने इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप की भी मांग की है। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास से मदद मांगी गई, वहीं बीजेपी विधायक गोपाल शर्मा भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

कुछ अभिभावकों का कहना है कि उन्हें बच्चों को करीब 9 किलोमीटर दूर स्थित दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने का सुझाव दिया गया है, जो उनके लिए व्यावहारिक नहीं है। खासकर छोटे बच्चों के लिए इतनी दूरी तय करना मुश्किल है।

इस पूरे विवाद के बीच एक दिलचस्प दृश्य भी देखने को मिला—जहां एक तरफ अभिभावक और स्कूल प्रबंधन के बीच तीखी बहस चल रही थी, वहीं छोटे-छोटे बच्चे अनजान होकर स्कूल के प्लेग्राउंड में खेलते नजर आए।

वहीं, स्कूल प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। स्कूल की प्रिंसिपल सरिता शर्मा ने स्पष्ट कहा कि स्कूल बंद नहीं किया जा रहा है और कुछ लोग अफवाह फैलाकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्कूल का संचालन सामान्य रूप से जारी रहेगा।

हालांकि, अभिभावक इस मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। वे लिखित में स्पष्ट गारंटी चाहते हैं कि स्कूल बंद नहीं होगा। जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलता, उनका विरोध जारी रहने की संभावना है।

फिलहाल स्कूल परिसर में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और अभिभावकों की चिंता साफ तौर पर देखी जा सकती है। बच्चों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।


निष्कर्ष:

जयपुर के इस स्कूल विवाद ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत को एक बार फिर उजागर किया है। अभिभावकों का भरोसा बनाए रखने के लिए स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट और लिखित जानकारी देना बेहद जरूरी है। जब तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं होती, तब तक यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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