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नोएडा हिंसा पर बड़ा खुलासा: ‘बाहरी साजिश’ से भड़का बवाल? 300 गिरफ्तार, पुलिस ने खोले कई राज

उत्तर प्रदेश: के औद्योगिक शहर नोएडा में फैक्टरी कर्मियों के प्रदर्शन ने सोमवार को अचानक हिंसक रूप ले लिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे मजदूरों ने वेतन बढ़ोतरी और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन देखते ही देखते यह आंदोलन उग्र हो गया और कई जगहों पर आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव की घटनाएं सामने आईं।

इस पूरे घटनाक्रम पर बड़ा खुलासा करते हुए गौतम बुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने दावा किया है कि इस हिंसा के पीछे बाहरी लोगों की साजिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब अधिकांश श्रमिक शांतिपूर्वक अपने-अपने स्थानों से लौट रहे थे, तभी बाहर से आए कुछ समूहों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और हिंसा को भड़काया।

पुलिस आयुक्त के अनुसार, “कई स्थानों पर श्रमिकों को समझाकर शांत किया गया था, लेकिन इसके बाद कुछ बाहरी तत्वों ने सीमावर्ती क्षेत्रों से प्रवेश कर तनाव पैदा किया।” उन्होंने बताया कि ऐसे कई लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य की पहचान की जा रही है।

कैसे भड़की हिंसा?

प्रदर्शन की शुरुआत सुबह करीब 9:30 बजे हुई थी, जब हजारों श्रमिक अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में इकट्ठा हुए। गौतम बुद्ध नगर के सेक्टर 62, सेक्टर 63, फेज-2, सेक्टर 60 और ग्रेटर नोएडा के कई हिस्सों में करीब 45,000 मजदूरों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन फेज-2 स्थित औद्योगिक इकाइयों के पास कुछ समूहों ने अचानक आक्रामक रुख अपना लिया। पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारी फैक्टरी की दीवारों पर चढ़ गए और तार की बाड़ काटकर अंदर घुसने की कोशिश की। इसके बाद भीड़ बेकाबू हो गई और पथराव शुरू हो गया।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। कई जगहों पर लाठीचार्ज किया गया और दंगा-रोधी बल को तैनात किया गया।

सोशल मीडिया और ‘संगठित साजिश’ का दावा

पुलिस ने इस पूरे मामले में एक बड़े संगठित नेटवर्क की आशंका जताई है। आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कई फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाए गए थे, जिनके जरिए श्रमिकों को उकसाने की कोशिश की गई।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए मजदूरों को QR कोड स्कैन कर जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जा रही थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि कोई संगठित गिरोह पर्दे के पीछे सक्रिय था।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस मामले में फंडिंग के स्रोत की जांच की जा रही है। यदि इसमें बाहरी या अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आते हैं, तो उसके आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कितनी हुई कार्रवाई?

पुलिस ने इस हिंसा के बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए अब तक 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। अलग-अलग घटनाओं के संबंध में सात एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, हिंसा भड़काने वाले कई संदिग्धों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

झड़पों के दौरान कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया और औद्योगिक इकाइयों को नुकसान पहुंचा।

सरकार और प्रशासन की अपील

पुलिस और प्रशासन ने मजदूरों से शांति बनाए रखने और काम पर लौटने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार मजदूरों की समस्याओं को समझती है और उनके समाधान के लिए गंभीर है। वेतन बढ़ोतरी को लेकर जल्द फैसला लिए जाने की संभावना भी जताई गई है।


निष्कर्ष:

नोएडा में भड़की हिंसा ने औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिक असंतोष दोनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का ‘बाहरी साजिश’ वाला दावा इस मामले को और संवेदनशील बनाता है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस पूरे घटनाक्रम की असल तस्वीर साफ करेंगे।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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