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RAS अफसर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: डमी कैंडिडेट बनकर दी परीक्षा, जमानत खारिज—सरकार बोली “राज्य बेच देता!”

सुप्रीम कोर्ट: ने निलंबित RAS अधिकारी हनुमानाराम विरड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। बुधवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इस स्तर पर राहत देना उचित नहीं है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए अदालत में कहा कि यदि ऐसा अधिकारी प्रशासनिक पद पर बना रहता, तो वह “राज्य तक बेच सकता था।” सरकार ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी का कृत्य केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सीधा हमला है।

मामले के अनुसार, हनुमानाराम पर आरोप है कि उन्होंने सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2021 और पटवारी भर्ती परीक्षा-2021 में डमी कैंडिडेट के रूप में अलग-अलग अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दी। जांच एजेंसियों के अनुसार यह एक संगठित परीक्षा घोटाले का हिस्सा है, जिसमें कई लोगों की मिलीभगत सामने आई है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी पर एक नहीं बल्कि कई बार डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देने के आरोप हैं, जो उसके निरंतर आपराधिक व्यवहार को दर्शाता है। यह कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि एक पैटर्न को दिखाता है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।

सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने अदालत को बताया कि आरोपी भले ही एक मेधावी छात्र रहा हो, लेकिन उसकी संलिप्तता एक बड़े परीक्षा रैकेट में सामने आई है। उन्होंने कहा कि आरोपी ने RAS परीक्षा में 22वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन इसके बावजूद उसने गलत रास्ता अपनाया।

गौरतलब है कि बाड़मेर जिले के बिसारणियां गांव निवासी हनुमानाराम विरड़ा को 9 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया था। प्रारंभिक FIR में उनका नाम नहीं था, लेकिन जांच के दौरान उनकी भूमिका सामने आई। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मामलों में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जा सकता है। यदि ऐसे आरोपों में शामिल लोगों को आसानी से राहत मिलती है, तो यह प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है।

यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में हो रहे भर्ती घोटालों की गंभीरता को उजागर करता है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में कई भर्ती परीक्षाओं में धांधली और फर्जीवाड़े के मामले सामने आए हैं, जिससे युवाओं का भरोसा सिस्टम पर कम हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति ऐसी हरकत करने की हिम्मत न कर सके। साथ ही, परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की जरूरत है।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि कानून के सामने कोई भी बड़ा या छोटा नहीं है। जो भी व्यक्ति सिस्टम के साथ खिलवाड़ करेगा, उसे कड़ी सजा भुगतनी होगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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