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गाजियाबाद में भीषण अग्निकांड: 500 झुग्गियां राख, 10 बच्चों के लापता होने का दावा; चश्मदीद ने बताई आग की वजह

उत्तर प्रदेश: के Ghaziabad के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र स्थित कनावनी गांव में गुरुवार दोपहर एक भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को दहला दिया। देखते ही देखते 500 से अधिक झुग्गियां आग की लपटों में घिर गईं और कुछ ही घंटों में राख में तब्दील हो गईं। इस घटना ने न केवल भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया, बल्कि कई परिवारों को बेघर भी कर दिया।

घटना दोपहर करीब 12 बजे की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की शुरुआत झुग्गियों के ऊपर से गुजर रही बिजली की तारों में हुए शॉर्ट सर्किट से हुई। खुद को आकाश बताने वाले एक चश्मदीद ने बताया कि अचानक तारों से चिंगारी निकली, जिसने पास की झुग्गियों को चपेट में ले लिया। तेज हवा और ज्वलनशील सामग्री के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया।

आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इलाके में मौजूद कबाड़ के गोदामों ने इसे और भड़काने का काम किया। प्लास्टिक, कागज और अन्य ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। इससे करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

इस हादसे की सबसे चिंताजनक बात यह है कि 8 से 10 बच्चों के लापता होने का दावा सामने आया है। चश्मदीद आकाश के अनुसार, जब आग लगी उस समय कई लोग अपने काम पर गए हुए थे, जबकि छोटे बच्चे झुग्गियों में ही मौजूद थे। आग फैलने के बाद से ही कई परिवार अपने बच्चों की तलाश में बदहवास हालत में इधर-उधर भटकते नजर आए।

हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक बच्चों के लापता होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि आग पर काबू पा लिया गया है और जैसे ही कूलिंग प्रक्रिया पूरी होगी, सर्च ऑपरेशन तेज किया जाएगा। दमकल और पुलिस की टीमें लगातार मौके पर मौजूद हैं और हर संभावित स्थान की जांच की जा रही है।

आग लगने के तुरंत बाद स्थिति और भी खतरनाक हो गई, जब झुग्गियों में रखे रसोई गैस सिलेंडर एक-एक कर फटने लगे। इन धमाकों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा और लोगों में दहशत फैल गई। कई लोगों ने जान बचाने के लिए अपने घरों से भागकर सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया।

सूचना मिलते ही दमकल विभाग की दर्जनों गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। आग इतनी व्यापक थी कि उसे काबू में लाने में कई घंटे लग गए। पुलिस और प्रशासन की टीमों ने भी राहत और बचाव कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई।

मौके पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंचे। राहत कार्यों की निगरानी के लिए डीएम, डीसीपी, एसीपी और फायर विभाग के अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का आंकलन किया जा रहा है और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी।

स्थानीय लोगों ने भी इस संकट की घड़ी में साहस दिखाया और अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने में दमकल कर्मियों की मदद की। कई लोगों ने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

यह हादसा एक बार फिर शहरी झुग्गी बस्तियों में सुरक्षा इंतजामों की कमी को उजागर करता है। बिजली के तारों की अनदेखी, अवैध निर्माण और ज्वलनशील सामग्री का भंडारण ऐसी घटनाओं को और खतरनाक बना देता है।


निष्कर्ष:

गाजियाबाद का यह अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि चेतावनी है कि घनी आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी घातक हो सकती है। फिलहाल सभी की नजरें लापता बच्चों की तलाश और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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