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क्या आज की राजनीति में नहीं बन पाते शिवचरण माथुर? हरीश मीणा का बड़ा बयान, पायलट ने अफसरों पर भी साधा निशाना

जयपुर: में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राजस्थान की राजनीति पर ऐसा बयान सामने आया, जिसने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी। टोंक-सवाई माधोपुर से सांसद हरीश मीणा ने कहा कि आज की राजनीति में हालात ऐसे हो गए हैं कि शिवचरण माथुर जैसे सादगीपूर्ण नेता सरपंच तक नहीं बन पाते। उनके इस बयान ने बदलती राजनीतिक संस्कृति, चुनावी खर्च और सत्ता के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

यह बयान रविवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित शिवचरण माथुर की जयंती समारोह के दौरान दिया गया। कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

“पहले के मुख्यमंत्री आज जैसे नहीं होते थे”

हरीश मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि पहले के जमाने के मुख्यमंत्री आज की तरह नहीं होते थे। उन्होंने शिवचरण माथुर की सादगी, स्पष्ट नीतियों और प्रशासनिक अनुशासन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज राजनीतिक हालात इतने बदल गए हैं कि उनके जैसे नेता पंचायत स्तर की राजनीति में भी संघर्ष करते नजर आते।

मीणा ने कहा, “आज सुनने में आता है कि एक थाने का SHO सीधे मुख्यमंत्री से बात कर लेता है। मैं खुद SP रहा हूं, लेकिन मेरी मुख्यमंत्री तो दूर, डीजी तक से सीधी बात नहीं होती थी। वो अलग दौर था।” उन्होंने इशारों में कहा कि आज प्रशासनिक मर्यादाएं और जिम्मेदारियां धुंधली होती जा रही हैं।

MLA-MP बनते ही खड़ी हो जाती हैं कोठियां

मीणा ने चुनावी राजनीति में बढ़ते खर्च और संपत्ति के सवाल को भी उठाया। उन्होंने कहा कि आज कोई विधायक या सांसद बनता है तो कुछ ही समय में कोठियां और फार्म हाउस खड़े हो जाते हैं। यह टिप्पणी सीधे तौर पर मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल मानी जा रही है।

उन्होंने आगे कहा कि पंचायत चुनाव तक जातीय समीकरणों के आधार पर लड़े जाते हैं। “आज सरपंच बनने से पहले जाति पूछी जाती है, आपकी जाति के वोट कितने हैं यह पूछा जाता है। ऐसे माहौल में आप बताइए, कौन-सी पंचायत से शिवचरण माथुर सरपंच बन पाते?” उनके इस सवाल ने सभा में मौजूद लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

पायलट बोले- केवल नेताओं को दोष देना ठीक नहीं

मीणा के बयान के बाद सचिन पायलट ने भी राजनीति के बदलते स्वरूप पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जमाना बदला है, लेकिन सारा दोष केवल नेताओं पर मढ़ देना उचित नहीं है। “बंगले और आलीशान मकान सिर्फ MLA-MP के ही नहीं हैं, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के घर भी कम नहीं हैं। इस पर भी चर्चा होनी चाहिए,” पायलट ने कहा।

पायलट ने चुनाव के बाद सरकार बनाने के उद्देश्य पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद केवल सत्ता सुख नहीं होना चाहिए। “मुखिया को कम से कम 70 प्रतिशत समय प्रशासन और विकास कार्यों में देना चाहिए। राजनीति के लिए 30 प्रतिशत समय काफी है। लेकिन आज हालात उलट हैं—80-90 प्रतिशत ऊर्जा राजनीति में खप जाती है।”

पॉलिसी मेकिंग पर भी उठाए सवाल

सचिन पायलट ने यह भी कहा कि बीते कुछ वर्षों में नीति निर्माण का काम चुनिंदा अधिकारियों को आउटसोर्स कर दिया गया है। इससे जनप्रतिनिधियों की भूमिका सीमित होती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज देश में बहुत कम नेता ऐसे बचे हैं जो अपनी सोच और स्पष्ट एजेंडे के साथ आगे बढ़ते हैं।

कार्यक्रम के दौरान शिवचरण माथुर के जीवन से जुड़े कई किस्से भी साझा किए गए। बताया गया कि वे श्याम नगर स्थित एक साधारण मकान में रहते थे और वहीं से इस दुनिया को अलविदा कहा। उनकी सादगी और ईमानदारी को आज भी राजनीतिक आदर्श के रूप में याद किया जाता है।

इस अवसर पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और प्रबुद्धजन मौजूद रहे। कार्यक्रम का माहौल श्रद्धा और चिंतन दोनों से भरा रहा, लेकिन नेताओं के बयानों ने इसे एक राजनीतिक विमर्श का रूप दे दिया।


निष्कर्ष:

जयपुर में आयोजित इस कार्यक्रम ने केवल श्रद्धांजलि तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि राजस्थान की बदलती राजनीतिक संस्कृति पर खुली बहस छेड़ दी। हरीश मीणा और सचिन पायलट के बयानों ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या आज की राजनीति में सादगी और सिद्धांतों के लिए जगह कम होती जा रही है? आने वाले दिनों में यह मुद्दा सियासी चर्चाओं का केंद्र बन सकता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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