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मेजर जनरल का बड़ा बयान- ‘असम राइफल्स सिर्फ फोर्स नहीं, पूर्वोत्तर से दिल का रिश्ता’ जयपुर में भावुक कर गया संबोधन

राजस्थान: की राजधानी जयपुर में रविवार को असम राइफल्स की ओर से भव्य भूतपूर्व सैनिक रैली का आयोजन किया गया। शहर के प्रतिष्ठित बीएम बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभक्ति, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का अनोखा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की अध्यक्षता असम राइफल्स के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल जय सिंह बैंसला ने की।

रैली में राजस्थान, हरियाणा सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, वीर नारियां और उनके परिवार शामिल हुए। समारोह के दौरान मेजर जनरल जय सिंह बैंसला का संबोधन सबसे अधिक चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि असम राइफल्स सिर्फ एक सुरक्षा बल नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के लोगों के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते का प्रतीक है।

“हमारा खून पूर्वोत्तर के लोगों की रगों में दौड़ता है”

मेजर जनरल बैंसला ने अपने संबोधन में कहा,
“असम राइफल्स के जवान रक्तदान शिविरों में अपना खून देते हैं और वही खून जरूरतमंद लोगों की रगों में दौड़ता है। हमें पूर्वोत्तर भारत से कोई अलग नहीं कर सकता।”

उनका यह बयान सुनकर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के लोगों के साथ असम राइफल्स का रिश्ता केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, विश्वास और समर्पण की मजबूत डोर से जुड़ा हुआ है।

देश का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल

मेजर जनरल बैंसला ने असम राइफल्स की ऐतिहासिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यह देश का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है और इसे “पूर्वोत्तर का प्रहरी” कहा जाता है। उन्होंने कहा कि संगठन ने वर्षों से देश की एकता, अखंडता और शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि हर जवान और पूर्व सैनिक को इस बात का गर्व होना चाहिए कि उनके योगदान ने देश को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

वीर नारियों और वीरता पुरस्कार विजेताओं का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले छह वीरता पुरस्कार विजेताओं और आठ वीर नारियों को सम्मानित किया गया। मंच पर सम्मान पाते समय कई वीर नारियां भावुक हो गईं।

सभागार में मौजूद लोगों ने खड़े होकर तालियों के जरिए उनके साहस, बलिदान और समर्पण को नमन किया। यह पल पूरे कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण माना गया।

पूर्व सैनिकों के लिए लगाए गए हेल्प डेस्क

रैली में पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष हेल्प डेस्क भी लगाए गए। यहां पेंशन, ईसीएचएस सुविधाएं, दस्तावेज सहायता, चिकित्सा परामर्श और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई गई।

असम राइफल्स के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्यक्रम संगठन के लगातार चल रहे आउटरीच अभियान का हिस्सा है। इस अभियान के तहत अब तक 17 राज्यों के 44 स्थानों पर पहुंचकर करीब 8,992 पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों से संवाद किया जा चुका है।

इसके अलावा 66 शैय्याग्रस्त पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों से व्यक्तिगत मुलाकात कर सहायता भी दी गई है।

पूर्व सैनिकों और जवानों के बीच मजबूत हुआ संवाद

कार्यक्रम पूर्व सैनिकों और वर्तमान जवानों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच भी बना। पूर्व सैनिकों ने अपने अनुभव साझा किए और युवाओं को सेना व अर्धसैनिक बलों में शामिल होकर देश सेवा के लिए प्रेरित किया।

समारोह में सैन्य परंपराओं, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की स्पष्ट झलक दिखाई दी। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसने माहौल को और भावुक व प्रेरणादायक बना दिया।

संगठन ने दोहराई प्रतिबद्धता

इस अवसर पर असम राइफल्स वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की उपाध्यक्ष ऋतु बैंसला ने भी वीर नारियों और पूर्व सैनिक परिवारों के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि संगठन हमेशा अपने सैनिक परिवारों के साथ खड़ा रहेगा।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।


निष्कर्ष:

जयपुर में आयोजित असम राइफल्स की भूतपूर्व सैनिक रैली केवल एक सैन्य कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि यह भावनाओं, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण बन गई। मेजर जनरल जय सिंह बैंसला के संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि असम राइफल्स और पूर्वोत्तर भारत के लोगों के बीच रिश्ता सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि विश्वास और आत्मीयता का है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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