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“जान दे दूंगा, रिफाइनरी शिफ्ट नहीं होने दूंगा!”—बाड़मेर प्रोजेक्ट के पीछे 14 साल का सियासी ड्रामा

राजस्थान: के बाड़मेर जिले में स्थित पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा किया जाना है। यह केवल एक औद्योगिक परियोजना का उद्घाटन नहीं, बल्कि करीब 14 साल से चल रहे सियासी संघर्ष, विवाद और ड्रामे का अंत भी माना जा रहा है।

इस रिफाइनरी की कहानी 2012 में शुरू हुई थी, जब इसे बाड़मेर के बायतु क्षेत्र के लीलाना गांव में स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन जैसे ही इसकी घोषणा हुई, इलाके में जमीन की कीमतों में अचानक उछाल आ गया। राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों और भूमाफियाओं ने बड़े पैमाने पर जमीन खरीदना शुरू कर दिया।

जमीन के दाम और किसानों की शर्तें

जब सरकार जमीन अधिग्रहण के लिए आगे बढ़ी, तो किसानों ने अप्रत्याशित मांगें रख दीं। कुछ किसानों ने एक बीघा जमीन के बदले एक करोड़ रुपए तक की मांग कर दी। इससे प्रोजेक्ट पर संकट खड़ा हो गया और सरकार को नई रणनीति बनानी पड़ी।

लीलाना से पचपदरा—लोकेशन बदलने का फैसला

तत्कालीन मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने इस स्थिति को देखते हुए प्रोजेक्ट को पचपदरा शिफ्ट करने का निर्णय लिया, जहां पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध थी। इस फैसले के बाद लीलाना में जमीन खरीदने वाले कई लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

अपनों के खिलाफ खड़े हुए नेता

रिफाइनरी शिफ्ट करने का फैसला राजनीतिक रूप से बेहद विवादित साबित हुआ। बायतु के तत्कालीन विधायक Sonaram Choudhary ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “जान दे दूंगा, लेकिन रिफाइनरी को यहां से जाने नहीं दूंगा।”

इस मुद्दे पर उस समय के राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने भी इस्तीफा दे दिया था, जिससे यह विवाद और गहरा गया।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर

इस प्रोजेक्ट को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे। बीजेपी का आरोप था कि कांग्रेस ने जल्दबाजी में शिलान्यास किया, जबकि कांग्रेस का कहना था कि यह एक आधुनिक और हाई-टेक प्रोजेक्ट है, जिसका लाभ पूरे राज्य को मिलेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने हाल ही में कहा कि रिफाइनरी जैसे तकनीकी विषय पर टिप्पणी करने का अधिकार केवल Vasundhara Raje को है, क्योंकि उन्हें इस क्षेत्र की बेहतर समझ है।

अब क्या है रिफाइनरी का महत्व?

पचपदरा में बन रही यह रिफाइनरी Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है, जिसमें HPCL की 74% और राज्य सरकार की 26% हिस्सेदारी है।

इस परियोजना की कुल लागत में समय के साथ भारी वृद्धि हुई है और अब यह करीब ₹42,000 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार हुई है। इसकी सालाना क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल को प्रोसेस करने की है।

राजस्थान की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के अनुसार, इस रिफाइनरी से राजस्थान को करीब 40,000 करोड़ रुपए का आर्थिक लाभ हो सकता है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि राज्य की औद्योगिक स्थिति भी मजबूत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर बदल सकता है, जहां लंबे समय से विकास की गति धीमी रही है।


निष्कर्ष:

बाड़मेर की पचपदरा रिफाइनरी केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि यह राजनीति, जमीन विवाद और आर्थिक संभावनाओं का संगम है। Narendra Modi द्वारा इसके उद्घाटन के साथ ही एक लंबा सियासी अध्याय समाप्त होगा और राजस्थान के विकास की नई कहानी शुरू होने की उम्मीद है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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