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“धोखा हुआ, अब हिसाब होगा!” बंगाल में गरजे अमित शाह, प्रचार खत्म होने से पहले सियासी पारा हाई

पश्चिम बंगाल: और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में प्रचार का आखिरी दिन जबरदस्त सियासी हलचल के साथ खत्म हुआ। जहां एक ओर बंगाल में पहले चरण की 152 सीटों के लिए चुनावी शोर थम गया, वहीं तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर भी प्रचार का समापन हो गया। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने दार्जिलिंग में रैली कर सत्ताधारी Mamata Banerjee की पार्टी Trinamool Congress पर तीखा हमला बोला।

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस और टीएमसी ने दार्जिलिंग और गोरखा समुदाय के साथ “धोखा और अन्याय” किया है। उन्होंने वादा किया कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो गोरखाओं की लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान छह महीने के भीतर किया जाएगा। शाह का यह बयान चुनावी माहौल को और गरमा गया है, खासकर पहाड़ी इलाकों में जहां गोरखा मुद्दा लंबे समय से प्रमुख राजनीतिक विषय रहा है।

इसी दौरान उन्होंने Darjeeling और आसनसोल में भी रैलियां कीं, जहां उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। शाह ने कहा कि “ममता दीदी का समय अब खत्म होने वाला है,” और आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं।

बंगाल में चुनाव आयोग ने भी सख्ती दिखाई है। मतदान से पहले निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कई प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनमें बाइक रैली पर रोक, दोपहिया वाहनों पर सख्त नियम और सुरक्षा बलों की तैनाती शामिल है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने भरोसा दिलाया है कि मतदान पूरी तरह भयमुक्त वातावरण में कराया जाएगा।

दूसरी ओर, तमिलनाडु में भी सियासी बयानबाजी चरम पर रही। भाजपा नेता K. Annamalai ने दावा किया कि राज्य में पार्टी जीत की ओर बढ़ रही है और जनता बदलाव चाहती है। वहीं Arvind Kejriwal ने चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा की नीतियों को “विभाजनकारी” बताया और कहा कि तमिलनाडु के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी भाजपा पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु के विकास में बाधा डाल रही है और राज्य के साथ “सौतेला व्यवहार” कर रही है।

इसके अलावा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने भी मतदाताओं से एनडीए के पक्ष में वोट करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह तमिलनाडु के लिए बदलाव का सही समय है और यदि मौका चूक गया तो अगले पांच साल तक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। इस बार चुनाव में सुरक्षा, महिला सुरक्षा, विकास और क्षेत्रीय अस्मिता जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं।

चुनावी माहौल में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज है। भाजपा जहां टीएमसी पर भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगा रही है, वहीं टीएमसी और विपक्ष भाजपा पर ध्रुवीकरण और आक्रामक राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं।

चुनाव आयोग की सख्ती और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का परिणाम न केवल राज्य की राजनीति, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी बड़ा असर डाल सकता है।


निष्कर्ष:

बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों में प्रचार खत्म होने के साथ ही सियासी घमासान अपने चरम पर पहुंच चुका है। अब सभी की नजरें मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि जनता किसके दावों और वादों पर भरोसा करती है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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