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42 बीघा जमीन विवाद में बड़ा यू-टर्न: हाईकोर्ट की रोक से 300 परिवारों को राहत, हाउसिंग बोर्ड की कार्रवाई पर ब्रेक

जयपुर: के टोंक रोड स्थित बी-टू बाईपास इलाके में 42 बीघा जमीन को लेकर चल रहे विवाद में बड़ा मोड़ आ गया है। Rajasthan High Court की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए करीब 300 परिवारों को बड़ी राहत दी है।

यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की बेंच ने सुनाया, जिसने 9 अप्रैल को दिए गए एकलपीठ के फैसले को फिलहाल स्थगित कर दिया। इस फैसले के बाद श्रीराम कॉलोनी में रहने वाले लोगों को राहत मिली है, जिन पर बेदखली का खतरा मंडरा रहा था।

दरअसल, एकलपीठ ने पहले जेडीए (जयपुर विकास प्राधिकरण) की 1995 की योजना स्वीकृति को अवैध करार देते हुए कहा था कि विक्रय पत्रों के आधार पर स्वामित्व का दावा मान्य नहीं है। इस आदेश के बाद राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने 16 अप्रैल को मौके पर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू कर दी थी।

हाउसिंग बोर्ड की टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब 20 परिवारों के अस्थायी और कुछ पक्के निर्माणों को ध्वस्त भी कर दिया था, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया था। कई परिवारों को अपना आशियाना खोने का डर सताने लगा था।

हालांकि अब खंडपीठ के ताजा आदेश ने इस पूरी कार्रवाई पर ब्रेक लगा दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पहले जैसी स्थिति बहाल की जाए, यानी जिन निर्माणों को तोड़ा गया है, उन्हें लेकर स्थिति को यथासंभव पूर्ववत किया जाए।

इस मामले में श्रीराम कॉलोनी-बी विकास समिति की ओर से अपील दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि इस जमीन पर पिछले चार दशकों से करीब 300 परिवार रह रहे हैं। उन्होंने 1981 में वैध विक्रय पत्रों के आधार पर जमीन खरीदी थी, जिन्हें अब शून्य घोषित करना न्यायसंगत नहीं है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि हाउसिंग बोर्ड ने उन पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, लेकिन ये आरोप पहले ही विभिन्न न्यायिक प्रक्रियाओं में खारिज हो चुके हैं। ऐसे में एकलपीठ का आदेश न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि इससे सैकड़ों परिवारों के अधिकारों का हनन भी होता है।

कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए फिलहाल एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी है और मामले की आगे सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया है।

इस फैसले के बाद प्रभावित परिवारों में राहत की लहर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पिछले 40 वर्षों से यहां रह रहे हैं और उनके पास जमीन के वैध दस्तावेज हैं। अचानक से उन्हें बेदखल करना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी गलत है।

दूसरी ओर, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड का कहना है कि यह जमीन सरकारी है और इस पर अवैध कब्जा किया गया है। बोर्ड का दावा है कि उसे कोर्ट के आदेश के आधार पर ही कार्रवाई करनी पड़ी थी।

अब खंडपीठ के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में नया कानूनी मोड़ आ गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कोर्ट इस विवाद का अंतिम समाधान किस दिशा में ले जाता है।

यह मामला न केवल जमीन के स्वामित्व का है, बल्कि सैकड़ों परिवारों के भविष्य और उनके आशियाने से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में कोर्ट का अंतिम फैसला दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।


निष्कर्ष:

बी-टू बाईपास जमीन विवाद में Rajasthan High Court की रोक ने फिलहाल 300 परिवारों को राहत जरूर दी है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है। यह मामला अब कानून और मानवीय अधिकारों के बीच संतुलन का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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