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ट्रम्प का बड़ा दांव: पाकिस्तान की अपील पर बढ़ा सीजफायर, ईरान को दी आखिरी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति: Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक फैसला लेते हुए सीजफायर को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। यह फैसला पाकिस्तान की अपील के बाद लिया गया, जहां प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना नेतृत्व ने अमेरिका से कुछ समय के लिए सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया था।

ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर हमले नहीं करेगा, ताकि बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई स्थायी समाधान नहीं है और अमेरिकी सेना को पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही जरूरत होगी, कार्रवाई तुरंत की जा सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री Ishaq Dar ने अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात कर सीजफायर बढ़ाने की अपील की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत की संभावनाएं भी बनाई जा रही थीं।

हालांकि, ईरान की ओर से अब तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी बरकरार है और स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है।

ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि ईरान के भीतर इस समय राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर एकजुटता की कमी है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया धीमी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान को रोजाना लगभग 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी कार्रवाई के चलते ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिसमें उसकी नौसेना, एयरफोर्स और कुछ न्यूक्लियर सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

इस बीच, Strait of Hormuz को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ती जा रही है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में से एक है और पिछले कुछ समय से यहां बाधा आने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर असर पड़ा है।

ब्रिटेन और फ्रांस ने इस संकट को देखते हुए 30 देशों की एक बैठक बुलाने का फैसला किया है, जिसमें इस जलमार्ग को दोबारा खोलने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने पर चर्चा की जाएगी। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने इस मुद्दे पर अमेरिका की रणनीति की आलोचना भी की है और कहा है कि इससे स्थिति और जटिल हो गई है।

वहीं, यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि यह सीजफायर ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा और आगे बड़ा संघर्ष हो सकता है। इससे यह साफ है कि क्षेत्र में शांति की संभावनाएं अभी भी कमजोर बनी हुई हैं।

कुल मिलाकर, अमेरिका द्वारा सीजफायर बढ़ाने का फैसला एक अस्थायी राहत जरूर देता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हालात अभी भी बेहद नाजुक हैं। आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया और प्रस्ताव इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।


निष्कर्ष:

अमेरिका का यह कदम कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह केवल समय खरीदने की रणनीति भी हो सकती है। जब तक ईरान और अमेरिका के बीच भरोसे की खाई कम नहीं होती, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं दिखती।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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