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नीति आयोग में बड़ा बदलाव! पीएम मोदी से मिले नए उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी, टीम में शामिल हुआ बड़ा नाम

देश: की प्रमुख नीति निर्माण संस्था नीति आयोग में हाल ही में हुए बड़े बदलाव के बाद नई टीम ने कामकाज तेज कर दिया है। इसी क्रम में आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने पद संभालने के एक दिन बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात न केवल औपचारिक थी, बल्कि इससे यह भी संकेत मिला कि केंद्र सरकार नीति निर्माण की प्रक्रिया को और अधिक सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

पहली मुलाकात, बड़े संकेत

डॉ. अशोक लाहिड़ी की यह प्रधानमंत्री के साथ पहली आधिकारिक बैठक थी। मुलाकात के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए इसे सम्मानजनक अवसर बताया। इस बैठक को नीति आयोग के नए नेतृत्व और सरकार के बीच बेहतर समन्वय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए लाहिड़ी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्र और लोक नीति में लाहिड़ी का अनुभव भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने की दिशा में अहम योगदान देगा। पीएम ने भरोसा जताया कि उनके नेतृत्व में नीति आयोग नई ऊर्जा के साथ काम करेगा।

कौन हैं अशोक लाहिड़ी?

अशोक लाहिड़ी देश के जाने-माने अर्थशास्त्री हैं। उन्होंने इस पद पर सुमन बेरी की जगह ली है, जो मई 2022 से उपाध्यक्ष थे। लाहिड़ी का करियर बेहद समृद्ध रहा है—

  • वे भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं
  • विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे वैश्विक संस्थानों में काम कर चुके हैं
  • दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं

इसके अलावा, वे पश्चिम बंगाल के बालुरघाट से विधायक भी हैं, जिससे उनके पास प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव का भी अच्छा संतुलन है।

नीति आयोग में नया चेहरा: गोबर्धन दास

इस पुनर्गठन में एक और अहम नाम गोबर्धन दास का है, जिन्हें नीति आयोग का सदस्य बनाया गया है। गोबर्धन दास एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद हैं।

वे पहले आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक रह चुके हैं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी अध्यापन कर चुके हैं। उनकी नियुक्ति से नीति आयोग में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोध आधारित नीति निर्माण को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पुनर्गठन के मायने

हाल ही में केंद्र सरकार ने नीति आयोग का पुनर्गठन किया है, जिसमें नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य नीति निर्माण को और अधिक प्रभावी बनाना, सहकारी संघवाद को मजबूत करना और विकास योजनाओं को जमीन पर तेजी से लागू करना है।

नीति आयोग, जो पहले योजना आयोग की जगह स्थापित किया गया था, अब देश की आर्थिक और सामाजिक नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री ने भी इसे ‘नीति निर्माण का मजबूत स्तंभ’ बताया है।

लाहिड़ी का विजन क्या है?

पीएम से मुलाकात के बाद अशोक लाहिड़ी ने कहा कि नीति बनाना ही नहीं, बल्कि उसका प्रभावी क्रियान्वयन भी बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि नीयत साफ होनी चाहिए और नीतियों पर विश्वास के साथ काम करना चाहिए।

उन्होंने भरोसा जताया कि वे प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे और देश के विकास में अपनी भूमिका निभाएंगे।

आगे की राह

नई टीम के साथ नीति आयोग से उम्मीदें बढ़ गई हैं। खासकर ऐसे समय में जब भारत ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, नीति आयोग की भूमिका और भी अहम हो जाती है।

अशोक लाहिड़ी और गोबर्धन दास जैसे अनुभवी और विशेषज्ञ व्यक्तित्वों के जुड़ने से यह उम्मीद की जा रही है कि नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर तेजी आएगी।


निष्कर्ष:

नीति आयोग में हुए इस बड़े बदलाव के बाद सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वह विकास और सुधारों को लेकर गंभीर है। अशोक लाहिड़ी का अनुभव और गोबर्धन दास की विशेषज्ञता मिलकर देश की नीति निर्माण प्रक्रिया को नई दिशा दे सकती है। अब नजर इस बात पर होगी कि ये नई टीम जमीनी स्तर पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ बदलाव ला पाती है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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