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जयपुर में अब ‘एरिया से बाहर’ लाइसेंस बनवाना नामुमकिन: पिन कोड लॉक हुआ लागू, दलालों की सेटिंग पर बड़ा वार

जयपुर: में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने को लेकर बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। अब शहर के लोग अपने एरिया के बाहर जाकर लाइसेंस नहीं बनवा सकेंगे। परिवहन विभाग ने ‘पिन कोड लॉक सिस्टम’ लागू कर दिया है, जिसके तहत हर आवेदक को उसी RTO कार्यालय में आवेदन करना होगा, जो उसके क्षेत्र के पिन कोड से जुड़ा होगा।

यह फैसला उस समय लिया गया, जब विभाग के सामने यह सामने आया कि ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग दूसरे RTO ऑफिस में जाकर लाइसेंस बनवा रहे थे। वजह साफ थी—जहां टेस्ट सख्त था, वहां से बचने के लिए लोग आसान रास्ता तलाश रहे थे।

क्यों लागू करना पड़ा नया नियम?

जयपुर के जगतपुरा स्थित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर नियमों के अनुसार सख्त जांच हो रही थी। यहां सेंसर बेस्ड सिस्टम से ड्राइविंग स्किल की जांच होती है, जिसमें गलती की गुंजाइश कम होती है।

लेकिन पिछले दो महीनों के आंकड़ों ने विभाग को चौंका दिया।

  • अन्य RTO कार्यालयों में 25,000 से ज्यादा लाइसेंस जारी हुए
  • जबकि जगतपुरा ट्रैक पर सिर्फ 1,640 लाइसेंस बने

इस बड़े अंतर ने साफ संकेत दिया कि लोग सख्ती से बचने के लिए दूसरे क्षेत्रों में आवेदन कर रहे थे।

अब कैसे काम करेगा पिन कोड लॉक सिस्टम?

नई व्यवस्था के तहत:

  • आवेदक का पता और पिन कोड सिस्टम में दर्ज होगा
  • उसी के आधार पर तय होगा कि वह किस RTO में आवेदन कर सकता है
  • किसी दूसरे RTO में आवेदन करने पर सिस्टम उसे रिजेक्ट कर देगा

इसका सीधा मतलब है—अब ‘शॉर्टकट’ खत्म।

दलालों और सेटिंग पर लगेगी रोक

परिवहन विभाग का मानना है कि यह कदम दलालों और फर्जी तरीके से लाइसेंस बनवाने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाएगा।

पहले कई जगहों पर बिना सही टेस्ट के लाइसेंस बन जाने की शिकायतें आती थीं। कुछ लोग पैसे देकर या जान-पहचान के जरिए दूसरे RTO से लाइसेंस बनवा लेते थे।

अब पिन कोड लॉक होने के बाद:

  • हर व्यक्ति को अपने क्षेत्र में ही टेस्ट देना होगा
  • ऑटोमेटेड ट्रैक पर ही स्किल चेक होगी
  • फर्जीवाड़े की संभावना काफी कम हो जाएगी

सड़क सुरक्षा पर क्या होगा असर?

यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

अब केवल वही लोग लाइसेंस पा सकेंगे, जो वास्तव में ड्राइविंग टेस्ट पास करेंगे। इससे:

  • अनट्रेंड ड्राइवरों की संख्या घटेगी
  • सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद है
  • ट्रैफिक नियमों का पालन बेहतर होगा

आवेदकों को क्या करना होगा?

अगर आप ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना चाहते हैं, तो:

  • अपने पते के अनुसार सही RTO चुनें
  • सभी दस्तावेज अपडेट रखें
  • ऑटोमेटेड टेस्ट के लिए तैयारी करें

अब पुराने तरीके—जैसे दूसरे जिले या ऑफिस में जाकर आवेदन करना—काम नहीं करेंगे।

अधिकारियों का क्या कहना है?

RTO प्रथम के अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव लंबे समय से जरूरी था। उन्होंने बताया कि पिन कोड लॉक से सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगा।

साथ ही, परिवहन आयुक्त को भेजे गए प्रस्ताव के बाद इसे पूरे सिस्टम में लागू किया गया है, जिससे सभी आवेदकों के लिए एक समान नियम सुनिश्चित हो सके।


निष्कर्ष:

जयपुर में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए पिन कोड लॉक सिस्टम बड़ा कदम है। अब ‘जुगाड़’ और ‘सेटिंग’ के जरिए लाइसेंस बनवाना मुश्किल हो जाएगा। इससे न सिर्फ सिस्टम में सुधार होगा, बल्कि सड़क सुरक्षा भी मजबूत होगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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