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केरल का अगला CM कौन? राहुल गांधी ने विधायकों को दी खुली छूट, 4 नाम सबसे आगे

केरल में मुख्यमंत्री को लेकर कांग्रेस में घमासान, राहुल गांधी ने विधायकों को दी अहम भूमिका

केरल: विधानसभा चुनाव में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर तेज मंथन चल रहा है और कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इस बीच राहुल गांधी के रुख ने इस राजनीतिक चर्चा को और गर्म कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी चाहते हैं कि केरल में विधायक दल का नेता विधायकों की सहमति से चुना जाए। उन्होंने तिरुअनंतपुरम भेजे गए पार्टी पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन को भी यह संदेश दे दिया है कि फैसला आम सहमति से हो तो बेहतर होगा।

चार बड़े नाम रेस में

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे वीडी सतीशन और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नीथला बताए जा रहे हैं। इसके अलावा शशि थरूर का नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

हालांकि कांग्रेस के भीतर यह साफ माना जा रहा है कि अंतिम फैसला राहुल गांधी की सहमति से ही होगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी की राय भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती है।


केसी वेणुगोपाल के नाम पर क्यों फंस सकता है मामला?

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के कई केंद्रीय नेता चाहते हैं कि केसी वेणुगोपाल को केरल भेजकर मुख्यमंत्री बनाया जाए। इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक वजह भी बताई जा रही है।

अगर वेणुगोपाल केरल की राजनीति में लौटते हैं, तो दिल्ली में संगठन महासचिव का पद खाली होगा। इससे कांग्रेस संगठन में नए नेतृत्व को मौका मिल सकता है।

लेकिन राहुल गांधी के करीबी सूत्रों का कहना है कि वेणुगोपाल पिछले कई वर्षों से राहुल के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल रहे हैं। ऐसे में राहुल उन्हें दिल्ली से हटाने के पक्ष में नहीं हैं।

इसके अलावा कई विधायक भी दिल्ली से किसी नेता को “थोपे जाने” के खिलाफ बताए जा रहे हैं। वे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री ऐसा चेहरा हो जो लंबे समय से केरल की राजनीति में सक्रिय रहा हो।

वेणुगोपाल के खिलाफ एक मामले में आरोपों की चर्चा भी पार्टी के भीतर हो रही है। कुछ नेताओं का मानना है कि भविष्य में इन आरोपों को लेकर उन पर दबाव बनाया जा सकता है।


वीडी सतीशन को युवा चेहरे का फायदा

मुख्यमंत्री पद की रेस में वीडी सतीशन भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उन्होंने सरकार के खिलाफ आक्रामक भूमिका निभाई थी।

उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका अपेक्षाकृत युवा और ऊर्जावान चेहरा माना जा रहा है। कांग्रेस के एक वर्ग का मानना है कि राज्य में पार्टी को नए नेतृत्व की जरूरत है।

हालांकि हाल ही में उनकी मंगलूरू यात्रा और जेडीएस नेताओं से कथित मुलाकात को लेकर विवाद भी सामने आया। पार्टी हाईकमान तक यह बात पहुंची कि जिस चार्टर्ड फ्लाइट से सतीशन गए थे, उसका मालिक विवादों में रहा है।

इसके बावजूद सतीशन समर्थकों का दावा है कि जनता के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है और वह लंबे समय तक कांग्रेस का चेहरा बन सकते हैं।


रमेश चेन्नीथला की वरिष्ठता बनी ताकत

वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नीथला को भी मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। संगठन और सरकार दोनों में उनके लंबे अनुभव को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया जा रहा है।

कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि जब पहले UDF सरकार बनी थी, तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के बावजूद चेन्नीथला की जगह ओमन चांडी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। ऐसे में इस बार उनकी दावेदारी को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

रमेश चेन्नीथला को सोनिया गांधी का भरोसेमंद नेता माना जाता है और पार्टी संगठन पर भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।


शशि थरूर का नाम भी चर्चा में

लोकसभा सांसद शशि थरूर का नाम भी मुख्यमंत्री पद की चर्चा में सामने आ रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस किसी सांसद को मुख्यमंत्री बनाकर उपचुनाव का जोखिम नहीं लेना चाहेगी।

फिर भी थरूर की लोकप्रियता, अंतरराष्ट्रीय छवि और शिक्षित वर्ग में मजबूत पकड़ उन्हें चर्चा में बनाए हुए है।


राहुल गांधी की रणनीति क्या है?

सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी इस बार विधायकों की राय को सर्वोच्च महत्व देना चाहते हैं। उन्होंने पहले भी कर्नाटक और तेलंगाना में इसी रणनीति को अपनाया था।

2018 में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी राहुल गांधी ने विधायकों की राय के आधार पर मुख्यमंत्री चयन में अहम भूमिका निभाई थी।

कांग्रेस के भीतर पंजाब का उदाहरण भी चर्चा में है, जहां विधायकों की राय के बावजूद चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया और बाद में पार्टी को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा।

इसी वजह से इस बार राहुल गांधी कोई जोखिम नहीं लेना चाहते और विधायक दल की राय को प्राथमिकता देने के पक्ष में हैं।


निष्कर्ष

केरल में UDF की जीत के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री चेहरे के चयन की है। केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन, रमेश चेन्नीथला और शशि थरूर के नाम चर्चा में हैं, लेकिन अंतिम फैसला राहुल गांधी और विधायकों की सहमति से ही तय होगा। आने वाले दिनों में केरल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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