रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव में उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी की एंट्री ने मुकाबला रोचक बना दिया है। भाजपा ने अभी तक अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन एनडीए के 12 विधायक नाथवानी के प्रस्तावक बनने जा रहे हैं। इसमें भाजपा के 9 विधायक और सहयोगी दलों—जेडीयू, आजसू और लोजपा—के विधायकों ने भी सहमति दी है।
पहले तक माना जा रहा था कि भाजपा अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ को भेजेगी। लेकिन नाथवानी की धमाकेदार एंट्री के बाद चुनावी समीकरण बदल गए। नाथवानी पहले भी 2008 और 2014 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा जा चुके हैं। इस बार भाजपा सुरक्षित और जीत सुनिश्चित करने वाले समीकरण पर दांव लगा रही है।
इस चुनाव में झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार हैं। सत्ता पक्ष इंडिया गठबंधन से JMM ने बैद्यनाथ राम और कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है। गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का बल है, जो कागजों पर दोनों सीटों की जीत पक्का करता है, लेकिन नाथवानी और वी. विजयसाई रेड्डी जैसी निर्दलीय दावेदारों की मौजूदगी से क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ गई है।
नाथवानी ने हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात की। उनके पुराने व्यापारिक और व्यक्तिगत संबंधों के चलते यदि एनडीए के वोट नाथवानी को मिलते हैं, तो जीत के लिए उन्हें केवल कुछ अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। कांग्रेस के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना इस चुनाव की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
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