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निकाय चुनाव के बीच अशोक गहलोत ने कांग्रेस की रणनीति पर उठाए सवाल, बोले- बेहतर प्लानिंग होती तो ज्यादा सीटें जीतते

जयपुर: राजस्थान के निकाय चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस की चुनावी रणनीति को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान ने पार्टी के भीतर रणनीति और संगठन को लेकर चर्चा तेज कर दी है। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस की ओर से बेहतर चुनावी प्लानिंग की जाती और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सभी नेता एक साथ मैदान में उतरते तो पार्टी अधिक सीटें जीत सकती थी। 

गहलोत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राजस्थान में निकाय अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया जारी है और राजनीतिक दल अपने पार्षदों को एकजुट रखने के साथ स्थानीय समीकरण साधने में जुटे हैं।

गहलोत ने चुनावी रणनीति पर क्या कहा?

अशोक गहलोत ने निकाय चुनाव में कांग्रेस की प्रचार रणनीति को लेकर कहा कि भाजपा की ओर से किए गए रोड शो का कांग्रेस को भी उसी स्तर पर जवाब देना चाहिए था। उनके मुताबिक, यदि कांग्रेस बेहतर योजना के साथ चुनाव मैदान में उतरती और पार्टी के सभी प्रमुख नेता एक साथ प्रचार करते तो परिणाम अलग हो सकते थे।

गहलोत ने निर्दलीय उम्मीदवारों के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने इस बात पर चर्चा की कि जब कांग्रेस का राज्यभर में संगठनात्मक नेटवर्क मौजूद है, तो निर्दलीय उम्मीदवारों को इतना बड़ा वोट प्रतिशत कैसे मिला। हालिया चुनाव आंकड़ों में निर्दलीयों को करीब 27.38 प्रतिशत वोट मिलने की रिपोर्ट सामने आई है। 

डोटासरा ने परिणामों को अलग नजरिए से बताया

निकाय चुनाव परिणामों के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा और कांग्रेस के वोट प्रतिशत के अंतर को एक प्रतिशत से कम बताते हुए इसे कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण आंकड़ा बताया था। डोटासरा ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस ने कई आरक्षित वार्डों में भाजपा से बेहतर प्रदर्शन किया। 

डोटासरा ने चुनाव परिणामों को लेकर परिसीमन और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई आरोप भी लगाए थे। ये उनके राजनीतिक दावे हैं, जिन पर भाजपा की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। 

निकाय अध्यक्षों के चुनाव के बीच बयान की टाइमिंग महत्वपूर्ण

गहलोत का बयान ऐसे वक्त सामने आया है जब नगर निकायों में अध्यक्ष और मेयर के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों अपने-अपने पार्षदों के साथ रणनीति बनाने में जुटे हैं और कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। 

ऐसे में गहलोत की ओर से चुनावी तैयारी और प्रचार रणनीति पर टिप्पणी को कांग्रेस की आगामी रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, उनके बयान से पार्टी के भीतर किसी व्यापक संगठनात्मक बदलाव का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।

निर्दलीयों की भूमिका बनी चर्चा का विषय

राजस्थान के निकाय चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी उल्लेखनीय संख्या में वार्ड जीते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा ने 4,179, कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीते। वोट शेयर में भाजपा करीब 35.19 प्रतिशत, कांग्रेस 34.25 प्रतिशत और निर्दलीय करीब 27.38 प्रतिशत रहे।

इसी वजह से कई नगर निकायों में अध्यक्ष के चुनाव के दौरान निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

कांग्रेस के भीतर रणनीति पर चर्चा तेज

गहलोत के बयान के बाद कांग्रेस की चुनावी रणनीति, प्रचार अभियान और संगठन के तालमेल को लेकर चर्चा तेज हुई है। दूसरी ओर डोटासरा ने चुनाव परिणामों को भाजपा के मुकाबले कांग्रेस के अपेक्षाकृत मजबूत वोट आधार के तौर पर पेश किया है। ऐसे में दोनों नेताओं की टिप्पणियां निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर चल रहे राजनीतिक विमर्श को सामने रखती हैं। 

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