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डिजिटल पत्रकारों के लिए बड़ी मांग: इंडियन मीडिया काउंसिल ने सीएम को लिखा पत्र, बजट में विशेष पैकेज की अपील

राज्य बजट में डिजिटल मीडिया और लघु समाचार पत्रों की अनदेखी का आरोप, मान्यता, बीमा और पेंशन योजना की उठाई मांग

राजस्थान: में डिजिटल पत्रकारों और लघु समाचार पत्रों के हितों को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। इंडियन मीडिया काउंसिल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर राज्य बजट में डिजिटल मीडिया और छोटे समाचार पत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की मांग की है। काउंसिल का कहना है कि हाल ही में प्रस्तुत बजट में इस वर्ग के हितों से जुड़ी कोई ठोस घोषणा नहीं की गई, जिससे मीडिया के इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में निराशा है।

काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमाकांत गोस्वामी ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि डिजिटल पत्रकार सीमित संसाधनों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों तक सूचनाएं पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज सूचना क्रांति के दौर में डिजिटल मीडिया आम जनता तक तेज़ और प्रभावी तरीके से खबरें पहुंचाने का प्रमुख माध्यम बन चुका है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त आर्थिक सहयोग और सुरक्षा प्रावधान उपलब्ध नहीं हैं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि डिजिटल पत्रकारों को अक्सर बिना संस्थागत समर्थन के कार्य करना पड़ता है। कई पत्रकार व्यक्तिगत संसाधनों के सहारे रिपोर्टिंग करते हैं, जिससे उनके सामने आर्थिक और पेशेवर चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे में सरकार को इस वर्ग के लिए स्पष्ट नीति और कल्याणकारी योजनाएं लानी चाहिए।

क्या-क्या मांगें उठाई गईं?

इंडियन मीडिया काउंसिल ने अपने पत्र में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं—

  • डिजिटल मीडिया को आधिकारिक मान्यता प्रदान की जाए।

  • डिजिटल पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना लागू की जाए।

  • सरकारी विज्ञापनों में पारदर्शी नीति के तहत डिजिटल मीडिया और छोटे समाचार पत्रों को उचित हिस्सा दिया जाए।

  • 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजना लागू की जाए।

काउंसिल का तर्क है कि प्रिंट मीडिया की तरह डिजिटल पत्रकारों को भी समान अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए। वर्तमान समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्य करने वाले पत्रकारों की संख्या लगातार बढ़ रही है और उनकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

लघु समाचार पत्रों के लिए भी राहत की मांग

पत्र में छोटे और लघु समाचार पत्रों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई है। काउंसिल ने कहा कि बढ़ती प्रिंटिंग लागत, कागज की कीमतों में वृद्धि और विज्ञापन वितरण में असमानता के कारण छोटे समाचार पत्र आर्थिक दबाव में हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए निम्न मांगें की गई हैं—

  • प्रिंटिंग लागत में राहत प्रदान की जाए।

  • सरकारी विज्ञापन वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

  • आर्थिक सहायता योजना लागू कर छोटे समाचार पत्रों को मजबूती दी जाए।

काउंसिल का मानना है कि यदि लघु समाचार पत्रों को सहयोग नहीं मिला तो ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में सूचना का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

संशोधित बजट या विशेष पैकेज की अपील

इंडियन मीडिया काउंसिल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि आगामी संशोधित बजट या किसी विशेष पैकेज के माध्यम से डिजिटल पत्रकारों और लघु समाचार पत्रों के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी मजबूती के लिए आवश्यक है कि सभी वर्गों को समान अवसर और सुरक्षा मिले।

राज्य में डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह मांग राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पत्र पर क्या रुख अपनाती है और क्या आने वाले समय में डिजिटल पत्रकारों के लिए कोई विशेष घोषणा की जाती है।


निष्कर्ष:

डिजिटल युग में सूचना का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में डिजिटल पत्रकारों और लघु समाचार पत्रों को संस्थागत समर्थन देना समय की मांग बन चुका है। इंडियन मीडिया काउंसिल द्वारा मुख्यमंत्री को लिखा गया यह पत्र मीडिया जगत के एक बड़े वर्ग की अपेक्षाओं को सामने लाता है। अब नजरें सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि क्या इस मांग को बजट या विशेष पैकेज के जरिए अमलीजामा पहनाया जाएगा।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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