Download App Now Register Now

सूट-बूट छोड़ बैलगाड़ी पर निकली बारात! चीन से आए मेहमान भी बने ‘देसी बाराती’, मारवाड़ी अंदाज ने जीता दिल

राजस्थान: के पाली जिले में एक ऐसी शादी देखने को मिली, जिसने आधुनिकता के दौर में परंपरा की एक अनोखी मिसाल पेश कर दी। यहां एक बिजनेसमैन की बारात कारों या लग्जरी गाड़ियों से नहीं, बल्कि बैलगाड़ियों से निकली। खास बात यह रही कि इस बारात में शामिल होने के लिए चीन से भी मेहमान पहुंचे और उन्होंने भी पूरे देसी अंदाज में इस अनोखे आयोजन का आनंद लिया।

बैलगाड़ी बनी शान, परंपरा बनी पहचान

यह अनोखी शादी पाली जिले के सादड़ी क्षेत्र में 26 अप्रैल को हुई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भादरास गांव के रहने वाले बिजनेसमैन सुरेश जणवा चौधरी ने अपनी शादी को पूरी तरह पारंपरिक तरीके से आयोजित करने का फैसला किया।

दूल्हा खुद सबसे आगे चल रही बैलगाड़ी में बैठा था, जहां उसने सूट-बूट की जगह अंगरखी (कुर्ता) और धोती पहन रखी थी। उसके साथ-साथ पूरी बारात में शामिल लोग भी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए।

7 बैलगाड़ियों में निकली बारात, लोकगीतों की गूंज

बारात में कुल 7 बैलगाड़ियां शामिल थीं, जिनमें परिवार और मेहमान बैठे हुए थे। महिलाएं रास्ते भर लोकगीत गाती हुई चल रही थीं, जिससे पूरा माहौल पूरी तरह से राजस्थानी संस्कृति में रंगा हुआ नजर आया।

हालांकि, कुछ आधुनिक साधनों के तौर पर 10 सफारी गाड़ियां भी साथ थीं, लेकिन मुख्य आकर्षण बैलगाड़ी ही रही।

चीन से आए मेहमान, देसी अंदाज में हुए शामिल

इस शादी की खास बात यह भी रही कि दूल्हे के दोस्त शंघाई (चीन) से खास तौर पर इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे थे। दूल्हे के दोस्त होंगफंग और उनके साथी भी बैलगाड़ियों में बैठकर बारात का हिस्सा बने।

उन्होंने भारतीय रीति-रिवाजों का नजदीक से अनुभव किया और इस देसी अंदाज का भरपूर आनंद लिया।

10 किलोमीटर तक बैलगाड़ी में सफर

दूल्हे का गांव भादरास और दुल्हन का गांव मुंडारा लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। इस पूरे रास्ते को बारात ने बैलगाड़ियों के जरिए तय किया।

यह नजारा न केवल गांव वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बना, बल्कि देखने वालों के लिए भी यह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था।

दूल्हे का संदेश—संस्कृति को जिंदा रखना जरूरी

दूल्हे सुरेश जणवा चौधरी पिछले करीब 9 वर्षों से चीन में इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का व्यवसाय कर रहे हैं। उन्होंने कई देशों की संस्कृति को करीब से देखा है।

उनका कहना है कि विदेशों में अपनी संस्कृति को बहुत महत्व दिया जाता है, जिसे देखकर उन्हें प्रेरणा मिली कि अपनी शादी को भी पूरी तरह मारवाड़ी परंपरा में किया जाए।

उन्होंने कहा कि “मारवाड़ी कल्चर और पारंपरिक पहनावे को बढ़ावा देना जरूरी है, इसलिए हमने सूट-बूट की जगह धोती-कुर्ता पहनने और बैलगाड़ी से बारात निकालने का फैसला किया।”

परिवार का भी रहा पूरा सहयोग

दूल्हे के भाई डॉ. मोहनलाल चौधरी ने बताया कि यह फैसला पहले से ही लिया गया था कि शादी देसी अंदाज में ही की जाएगी।

उन्होंने कहा कि दोनों भाई विदेश में रह चुके हैं और चीन में पढ़ाई भी की है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना उनके लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।

दुल्हन भी बनी इस परंपरा का हिस्सा

सुरेश जणवा चौधरी की शादी मुंडारा गांव की रहने वाली प्रवीणा के साथ हुई। यह शादी न केवल दो लोगों का मिलन थी, बल्कि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन का भी एक शानदार उदाहरण बन गई।


निष्कर्ष:

पाली की यह शादी इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता के बीच भी परंपराओं को जिंदा रखा जा सकता है। बैलगाड़ी पर निकली यह बारात सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का संदेश भी है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

Related News

All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.

BREAKING NEWS
सूर्या के कत्ल की असली वजह आई सामने, बाइक बनी जानलेवा विवाद का कारण। | राजस्थान में 33 जिलों में 77 सड़क परियोजनाओं को मिली मंजूरी, बजट 2026-27 में कुल 676.74 करोड़ खर्च | राजस्थान में 33 जिलों में 77 सड़क परियोजनाओं को मिली मंजूरी, बजट 2026-27 में कुल 676.74 करोड़ खर्च | | | | राजस्थान वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2026: ऑनलाइन आवेदन शुरू | | JDA के नोटिस के बावजूद चल रहा “Boss Cafe” का रूफटॉप रेस्टोरेंट, स्टे की आड़ में नियमों को चुनौती? | जेडीए की नाक के नीचे सरकारी जमीन पर फिर कब्जा, बुलडोजर चला… लेकिन अवैध कॉलोनी फिर खड़ी हो गई! | राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 'आटा-साटा' प्रथा को बताया कानूनी व नैतिक रूप से दिवालिया, कहा- 'बेटी किसी सौदे की कीमत नहीं' | जेडीए की नाक के नीचे सरकारी जमीन पर फिर कब्जा, बुलडोजर चला… लेकिन अवैध कॉलोनी फिर खड़ी हो गई! |