झालावाड़। राजस्थान के कई जिलों में गरीब परिवारों की नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त का खेल लंबे समय से चल रहा है। यह मामला झालावाड़, बूंदी, सवाई माधोपुर, टोंक और भीलवाड़ा जिलों में सामने आया है। स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच के बाद छह सदस्यों को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि लड़कियों को नाच-गाने के नाम पर लीज पर लिया जाता था। स्टाम्प पेपर पर इकरारनामे तैयार किए जाते थे, जिसमें पिता की खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देकर रकम तय की जाती थी। उदाहरण के लिए, एक लड़की के लिए मध्यप्रदेश के व्यक्ति से एक साल के लिए 3.40 लाख और आठ साल के लिए 27.20 लाख रुपए का सौदा हुआ। इसमें जमानती रामकन्या बाई बनाई जाती थी और इकरारनामे में शर्तें रखी जाती थीं कि लड़की के भागने या आत्महत्या की स्थिति में परिवार से वसूली या विवाद नहीं होगा।
झालावाड़ पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि दलाल चार से आठ साल की लड़कियों को खरीदकर अन्य शहरों में गिरोह के सदस्यों को बेच देते थे। कुछ साल तक इन्हें प्रशिक्षित किया जाता और फिर मुंबई और अन्य महानगरों में बड़े गिरोह को देह व्यापार के लिए सौंप दिया जाता।
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