Rajasthan। राज्य की सबसे बड़ी जल परियोजना, राम जल सेतु लिंक परियोजना, जिसकी लागत लगभग 89 हजार करोड़ रुपए है, के लिए फंडिंग के नए विकल्पों पर चर्चा जारी है। अब तक 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता के फॉर्मूले पर विचार चल रहा था, लेकिन 60:30:10 वैकल्पिक मॉडल पर भी विचार किया जा रहा है। इस मॉडल में 60 प्रतिशत अनुदान, 30 प्रतिशत बिना ब्याज ऋण और 10 प्रतिशत राज्य का योगदान प्रस्तावित है।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय और राजस्थान सरकार इस वैकल्पिक मॉडल की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवहार्यता का परीक्षण कर रहे हैं। अभी तक किसी भी मॉडल पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता का विकल्प पूरी तरह बरकरार है।
मध्यप्रदेश-यूपी की केन-बेतवा लिंक परियोजना को ही 90 प्रतिशत तक फंडिंग मिली है। इसी आधार पर राजस्थान भी 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता की मांग कर रहा है, क्योंकि दोनों परियोजनाएं नदी जोड़ो अभियान से जुड़ी हैं। परियोजना में पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक इकाइयों को पानी सप्लाई किया जाएगा।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने इस परियोजना पर पीआइबी (Public Investment Board) नोट तैयार किया है, जिसे केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। नोट में परियोजना की पूरी रूपरेखा, तकनीकी पहलू और फंडिंग मैकेनिज्म शामिल हैं।
परियोजना राजस्थान के भविष्य से जुड़ी है और राज्य सरकार का प्रयास है कि राज्य को अधिकतम और व्यावहारिक केंद्रीय सहयोग मिले। फंडिंग के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और सकारात्मक निर्णय के बाद परियोजना जल्द आगे बढ़ेगी।
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