राजस्थान राज्य बीज निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर विश्नोई और उनके रिश्तेदार स्वतंत्र ज्याणी को 2.43 करोड़ रुपए की भारी घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। इस घूसकांड ने राजनीतिक गलियारों में जोरदार हलचल पैदा कर दी है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने लगातार भाजपा सरकार और विशेष रूप से कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि यह मामला केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि एक बड़े और संगठित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का हिस्सा है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पूरे मामले में दावा किया कि कृषि विभाग और बीज निगम में किसानों को बांटे जाने वाले नकली खाद-बीज की जांच करने के नाम पर पर्दे के पीछे एक मजबूत ब्लैकमेलिंग और वसूली का नेटवर्क काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घूस राशि (2.43 करोड़) बिना उच्च स्तरीय संरक्षण या राजनीतिक संरक्षण के किसी अधिकारी द्वारा वसूली नहीं की जा सकती। गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग की है कि इस पूरे नेक्सस की गहन और निष्पक्ष जांच करवाई जाए और इसमें कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की भूमिका भी शामिल की जाए।
गहलोत ने अपने बयान में यह भी कहा कि जो अधिकारी पहले छापेमारी के दौरान बड़े नाटकीय अंदाज में खड़े रहते थे, वे ही पर्दे के पीछे व्यापारियों से करोड़ों की वसूली कर रहे थे। उन्होंने इस कार्रवाई का स्वागत किया, लेकिन कहा कि यह मामला सीधे तौर पर राजस्थान के लाखों गरीब किसानों और अन्नदाताओं के भरोसे को प्रभावित करता है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि पूरे राजस्थान में खाद-बीज व्यापारियों से डरा-धमकाकर लगभग 500 करोड़ रुपए की अवैध वसूली की जा रही थी। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि विभागीय जांच का नाम देकर बड़े-बड़े छापे मारे जाते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे चहेते अधिकारियों के माध्यम से करोड़ों की वसूली की जाती है।
राजस्थान कांग्रेस इस मामले को भाजपा सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। अशोक गहलोत के बयान के बाद मामला शीर्ष स्तर तक पहुंच गया है और भाजपा के अंदर भी बेचैनी बढ़ने की संभावना है।
मामले में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जबकि उन्होंने पिछले सप्ताह सीकर में घूस आरोपों पर अपने अधिकारियों का समर्थन किया था और कहा था कि यदि भ्रष्टाचार साबित हुआ तो वह इस्तीफा देंगे। अब, जब यह आरोप उनके सीधे करीबी बीज निगम के डायरेक्टर पर सिद्ध हो गया है, विपक्ष उन पर लगातार दबाव बना रहा है।
इस पूरी स्थिति ने राजस्थान में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सियासी भूचाल ला दिया है। इस घूसकांड का असर किसानों, व्यापारियों और पूरे कृषि विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर रूप से पड़ा है।
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