जयपुर। राजस्थान में शहरी निकाय चुनावों के बाद कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग और अंदरूनी कलह का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। पाली नगर निगम में मेयर चुनाव को लेकर विवाद के बीच कांग्रेस के बागी पार्षदों ने जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस वॉर रूम में हंगामा किया। पार्षदों ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने की मांग की, लेकिन जोशी ने उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने की सलाह दी।
CP जोशी से मिलने की मांग पर अड़े पार्षद
शहरी निकाय चुनावों में क्रॉस वोटिंग और कथित भीतरघात की जांच के लिए डॉ. सीपी जोशी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इसी सिलसिले में जयपुर में बैठक आयोजित की गई थी, जहां विभिन्न निकायों के नेताओं को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था। पाली से पहुंचे कुछ पार्षदों ने आरोप लगाया कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। उन्होंने जोशी से मुलाकात की मांग की, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।
इस दौरान डॉ. सीपी जोशी ने पार्षदों से कहा कि कमेटी का काम अलग है और उन्हें अपनी बात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के सामने रखनी चाहिए। इसके बाद जोशी वहां से रवाना हो गए। उनके जाने के बाद नाराज पार्षदों ने विरोध जताया।
पाली में 29 पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को मिले सिर्फ 3 वोट
पाली नगर निगम के 65 वार्डों में कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और निर्दलीय 15 पार्षद जीते थे। मेयर चुनाव में कांग्रेस ने सुमित्रा जैन को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस की राजबाला हिंगड़ ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मेयर चुनाव में सुमित्रा जैन को केवल 3 वोट मिले, जबकि भाजपा के उम्मीदवार को 33 और राजबाला हिंगड़ को 29 वोट मिले। इन नतीजों के बाद कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग और पार्टी के भीतर कथित गुटबाजी को लेकर विवाद गहरा गया।
गलत टिकट वितरण को बताया हार की वजह
प्रदर्शन कर रहे पार्षदों ने आरोप लगाया कि गलत उम्मीदवार को टिकट दिए जाने के कारण पार्टी को नुकसान हुआ। उनका कहना है कि जीतने के बावजूद कांग्रेस मेयर पद हासिल नहीं कर सकी और उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुना गया। वहीं, क्रॉस वोटिंग को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच अभी कमेटी कर रही है।
जांच रिपोर्ट के बाद हो सकती है कार्रवाई
डॉ. सीपी जोशी की अध्यक्षता वाली कमेटी निकाय चुनावों में कथित क्रॉस वोटिंग और भीतरघात के मामलों की पड़ताल कर रही है। रिपोर्ट के आधार पर पार्टी आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है। पाली का विवाद अब कांग्रेस के संगठनात्मक नेतृत्व के सामने चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और पार्टी के फैसले पर सभी की नजर रहेगी।
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