अजमेर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। अजमेर के दो बार महापौर रह चुके धर्मेंद्र गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की है। स्वायत्त शासन विभाग (DLB) की ओर से दो पुराने मामलों में नोटिस जारी कर जवाब मांगे जाने से गहलोत नाराज हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
धर्मेंद्र गहलोत ने गुरुवार को वीडियो जारी कर कहा कि उनके और वासुदेव देवनानी के बीच राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय उन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से स्वायत्त शासन विभाग के माध्यम से नोटिस जारी करवाए गए। गहलोत के मुताबिक, इस विवाद के कारण चुनाव के दौरान भाजपा पर सवाल उठ सकते हैं। इसलिए उन्होंने पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया है। हालांकि, देवनानी की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
गहलोत ने बताया कि स्वायत्त शासन विभाग ने 18 अगस्त को दो मामलों में नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उनके अनुसार, इनमें से एक शिकायत वर्ष 2021 की है, जब वह महापौर नहीं थे, जबकि दूसरा मामला उनके महापौर कार्यकाल से करीब छह-सात साल पुराना है। गहलोत ने आरोप लगाया कि इन नोटिसों के जरिए उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जब तक मामले का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक वह नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने प्रदेश नेतृत्व से नागौर नगर परिषद के आगामी चुनाव के प्रभारी पद से भी मुक्त करने का आग्रह किया।
धर्मेंद्र गहलोत ने वीडियो में वासुदेव देवनानी को चुनौती देते हुए कहा कि वह किसी के सामने झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विवाद उनके और देवनानी के बीच का है और वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। साथ ही उन्होंने इस घटनाक्रम से भाजपा को होने वाली संभावित असुविधा के लिए पार्टी से क्षमा भी मांगी।
धर्मेंद्र गहलोत के महापौर कार्यकाल के दौरान करीब छह साल पहले 13 व्यावसायिक नक्शों की फाइलों को मंजूरी दिए जाने का मामला चर्चा में आया था। आरोप था कि नियमों के विपरीत निगम के उपायुक्त से इन नक्शों को मंजूरी दिलाई गई। शिकायत मिलने के बाद राज्य सरकार ने तत्कालीन एडीएम सिटी अशोक योगी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी।
इस मामले में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 39 के तहत तत्कालीन महापौर को नोटिस जारी किया गया था। गहलोत ने इस नोटिस को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी।
जांच रिपोर्ट में सेटबैक और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े प्रावधानों के पालन में कमी, पांच मीटर से अधिक ऊंचाई की अनुमति देने तथा निर्धारित नियमों से इतर अन्य मंजूरियां दिए जाने जैसे बिंदु सामने आए थे। रिपोर्ट में गैर-योजना क्षेत्र और योजनागत क्षेत्र के नियमों के लाभ के इस्तेमाल के साथ अनुमत भूतल से आगे अन्य मंजिलों पर भी व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने संबंधी सवाल उठाए गए थे।
फिलहाल धर्मेंद्र गहलोत के इस्तीफे और देवनानी पर लगाए गए आरोपों से अजमेर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले इस घटनाक्रम का भाजपा की रणनीति और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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